प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 24 अगस्त 2025
कलिंगा विश्वविद्यालय और सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) के संयुक्त तत्वावधान में 22 और 23 अगस्त को “आर्द्रभूमि बचाओ अभियान” के तहत दो दिवसीय कार्यशाला और गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और समाज को आर्द्रभूमियों एवं जल संरक्षण के महत्व से जोड़ना था।

मुख्य अतिथि और विशेष संबोधन
कार्यक्रम में पद्मश्री समाजसेवी व जल आंदोलन से जुड़े उमाशंकर पाण्डेय मुख्य अतिथि रहे, वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में अरुण कुमार पाण्डेय (IFS) शामिल हुए।
- उमाशंकर पाण्डेय ने कहा— “भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति जल से जुड़ी रही है। आज पानी का अंधाधुंध उपयोग और औद्योगिक बर्बादी हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। हर फसल और हर निवाले के पीछे सैकड़ों लीटर पानी लगता है। यदि हमने अभी ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ियां पानी की भारी कमी से जूझेंगी। वर्षा जल संचयन को अपनाना होगा।”
- अरुण कुमार पाण्डेय (IFS) ने कहा— “देश के जलाशय अतिक्रमण और प्रदूषण की चपेट में हैं। तालाब और आर्द्रभूमियां जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद जरूरी हैं। जनभागीदारी से ही इन्हें बचाया जा सकता है।”
विश्वविद्यालय की पहल
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने कहा कि— “प्रकृति और मनुष्य का संवाद प्राचीन काल से चलता आ रहा है। आज भी प्रकृति हमसे सवाल पूछ रही है और हमें उसके उत्तर देने की जिम्मेदारी है।”
प्रमुख गतिविधियां
- डॉ. मनोज सिंह (विभागाध्यक्ष, जंतु विज्ञान) ने विद्यार्थियों को “जल मित्र” बनने और आर्द्रभूमि व जलाशयों की रक्षा की शपथ दिलाई।
- प्रभात मिश्रा (समाजसेवी) ने वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सिरपुर, दलपतसागर और बोरिया तालाब में किए गए जीर्णोद्धार कार्यों का अनुभव साझा किया।
- दूसरे दिन छात्रों और अतिथियों ने सेंध झील में सफाई अभियान चलाया तथा प्लास्टिक व पॉलिथीन मुक्त पर्यावरण का संकल्प लिया।
- पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने छात्रों से अपने जन्मदिन पर पांच-पांच पेड़ लगाने का संकल्प भी दिलवाया।
समापन
समारोह का संचालन अभिस्मिता राय ने किया। अंत में तुषार शर्मा (स्टेट हेड, CEED) ने सभी छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर— डॉ. मनोज सिंह, डॉ. अजय हरित, डॉ. अभिषेक कुमार पाण्डेय, डॉ. दीपा बिस्वास, डॉ. फैज़ बक्स और डॉ. सोहिनी भट्टाचार्य उपस्थित रहे।





