प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 05 नवंबर 2025।
कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दस्तक दे रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब प्रशासन ने पहली बार इन दुर्गम इलाकों के सात गांवों — उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप आयोजित किया।

इस शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल थे।
डॉक्टरों ने एक बालक को हृदय रोग से पीड़ित पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार किया गया और मुफ्त दवाइयां वितरित की गईं।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार की उम्मीद है।
बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने कहा, “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”
ग्रामीणों के बीच अब भय की जगह विश्वास और विकास की भावना देखने को मिल रही है। शासन-प्रशासन से जुड़कर वे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की ओर अग्रसर हैं।
बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब “माओवाद नहीं, विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।”



