डिजिटल डेस्क

नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025
देश की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को भारतीय सेना से बर्खास्त किए गए ईसाई आर्मी ऑफिसर सैमुअल कमलेसन की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा सकती, और ऐसे अधिकारी सेना में रहने योग्य नहीं हैं।
नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमलेसन की दलीलों को ठुकराते हुए कहा—
“वह कैसा संदेश दे रहा है? एक आर्मी ऑफिसर की यह बड़ी अनुशासनहीनता है। उसे नौकरी से निकालना सही था। ऐसे झगड़ालू लोग मिलिट्री में रहने के लायक नहीं।”
- सैमुअल कमलेसन, तीसरी कैवलरी रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट थे।
- उन्हें गुरुद्वारे में पूजा-अर्चना में शामिल होने का आदेश मिला था।
- कमलेसन ने कहा कि उनका ईसाई एकेश्वरवादी धर्म इसकी इजाजत नहीं देता, इसलिए वे नहीं जाएंगे।
- इसे सेना ने डिसिप्लिन तोड़ने के रूप में देखा और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
कमलेसन ने मई में दिल्ली हाईकोर्ट में फैसला चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी सेना के निर्णय को सही ठहराया था।
कमलेसन की ओर से सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि:
- कमलेसन ने होली, दीवाली जैसे त्योहारों में हिस्सा लेकर सभी धर्मों का सम्मान किया है।
- एक गलती के लिए उन्हें बर्खास्त करना अत्यधिक सख्त सज़ा है।
- संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट इन तर्कों से सहमत नहीं हुआ।
पीठ ने कहा—
“हो सकता है वह अच्छे ऑफिसर हों, पर इंडियन आर्मी के लिए मिसफिट हैं। सेना पर आज बड़े-बड़े दायित्व हैं। ऐसे मुद्दों को बढ़ने नहीं दे सकते।”





