प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 08 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल की 3 दिन की पुलिस रिमांड आज खत्म हो रही है। 6 दिसंबर को जब वे देवेंद्रनगर थाने में सरेंडर करने पहुंचे थे, उसी समय थाने से करीब 20 मीटर पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसके बाद कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस रिमांड दी।
इस दौरान शुक्रवार को उनकी मां का निधन हो गया। कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस कस्टडी में ही उन्हें अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव ले जाया गया।
अमित बघेल पर 5 राज्यों में 12 FIR दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर स्पष्ट कर चुका है—उन्हें हर राज्य की अलग कानूनी प्रक्रिया का सामना करना ही होगा।
इस पूरे मामले को सीनियर क्रिमिनल लॉयर हितेन्द्र तिवारी के जवाबों से 10 सवालों में समझिए—
सबसे पहले वही राज्य कार्रवाई करता है जिसने पहले गिरफ्तारी की। इस केस में शुरुआत छत्तीसगढ़ ने की, इसलिए प्राथमिक कार्रवाई उसी की होगी। आगे आरोपी को दूसरे राज्यों में भेजने का निर्णय प्रोडक्शन वारंट और ट्रांजिट रिमांड से तय होता है।
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है—FIR क्लबिंग पर कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
हर FIR अलग रहेगी और हर राज्य की पुलिस अपनी जांच करेगी।
जिस राज्य ने पहले गिरफ्तार किया—इस केस में छत्तीसगढ़।
बाकी राज्यों को आरोपी की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट भेजना होगा।
हां। हर FIR में अलग रिमांड, अलग बेल, अलग ट्रायल होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई में कहा था—“पुलिस आपको देश घुमाएगी, सफर का आनंद लीजिए।”
नहीं।
हर FIR में अलग जमानत लेनी होगी, चाहे वह एंटीसिपेट्री हो या रेगुलर बेल।
अमित बघेल ने ऐसी मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
अब उन्हें हर राज्य में पेश होना ही होगा।
कोर्ट सीमित समय के लिए कस्टडी ब्रेक या अस्थाई अनुमति दे सकता है।
अमित बघेल के मामले में भी ऐसा ही हुआ—अंतिम संस्कार तक की अनुमति और फिर कस्टडी में वापसी।
अगर बयान किसी समुदाय या व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है,
तो यह फ्रीडम ऑफ स्पीच का दुरुपयोग माना जाता है।
ऐसे मामलों में पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गिरफ्तारी कर सकती है।
- 3 दिन की रिमांड खत्म
- इसके बाद कोर्ट ज्यूडिशियल कस्टडी या नई रिमांड तय करेगा
- अन्य राज्य भेजेंगे प्रोडक्शन वारंट
- एक-एक कर सभी FIR वाले राज्यों में पेशी होगी
- हर जगह अलग बेल अर्जी
फिलहाल इसकी संभावना बेहद कम।
अमित बघेल के खिलाफ कई गैर-जमानती धाराओं में केस हैं।
सुप्रीम कोर्ट अग्रिम जमानत खारिज कर चुका है।
ऐसे में त्वरित राहत लगभग असंभव मानी जा रही है।





