रायगढ़, 08 दिसंबर 2025

तमनार ब्लॉक में जेपीएल की प्रस्तावित गारे–पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर-1 खदान के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध चौथे दिन भी जारी है। 14 गांवों के लोग 5 नवंबर से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मानव श्रृंखला बनाकर इसका घेराव कर दिया।
ग्रामीणों के समर्थन में लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी पहुंचीं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने स्कूल मैदान में जनसुनवाई करने की घोषणा की थी, लेकिन उसे गुपचुप तरीके से बाजार परिसर के अंदर एक कमरे में संपन्न करा दिया गया।
सुबह से भारी पुलिस बल तैनात था, जो जनसुनवाई की खबर फैलने के बाद वापस लौट गया, लेकिन ग्रामीण मैदान में अब भी डटे हुए हैं।
- खदान से विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट बढ़ेगा।
- तमनार क्षेत्र पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहा है।
- भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।
- जल–जंगल–जमीन तेजी से नष्ट हो रहे हैं।
- पेसा क्षेत्र में ग्राम सभा की अनुमति के बिना जनसुनवाई अवैध है।
धौराभांठा स्कूल मैदान में धरने पर बैठे गांव –
झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल सहित 14 गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग—
➡️ जनसुनवाई रद्द की जाए
➡️ नई कोल खदान किसी भी हाल में शुरू न हो
महिला जानकी चौहान ने कहा— “हम अपनी जमीनें नहीं देंगे।”
अमरमती सिदार ने बताया— “5 नवंबर से लगातार आंदोलन जारी है।”
सेत कुमारी चौहान बोलीं— “घेराबंदी इसलिए की ताकि बाहरी लोग जनसुनवाई न कर सकें।”
संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी राधेश्याम शर्मा ने कहा—
- यह पेसा क्षेत्र है
- 14 गांव खदान से प्रभावित हैं
- ग्राम सभा का अनुमोदन नहीं
- पुलिस-प्रशासन गुपचुप तरीके से जनसुनवाई करवाने में लगा है
उन्होंने कहा कि जिस स्थान को ग्रामीणों ने घेर रखा है, वहीं की जनसुनवाई मान्य होगी।
रायगढ़ के ग्रामीण एक बार फिर जल–जंगल–जमीन की रक्षा के लिए डटे हैं और उनका साफ कहना है—
“कोयला खदान नहीं चाहिए, हमारी जमीन नहीं देंगे।”



