प्रमोद कुमार
रायपुर, 10 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ आर्थोपेडिक एसोसिएशन की सिल्वर जुबली कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन आधुनिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी और नई तकनीकों पर बड़ा मंथन हुआ। देश-विदेश से आए 500 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि अब उन्नत इम्प्लांट, नेलिंग और रिप्लेसमेंट तकनीकों से फ्रैक्चर मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन चलना शुरू कर रहे हैं, जिससे इलाज तेज, सुरक्षित और ज्यादा प्रभावी हो गया है।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. अनिल वर्मा, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुशील शर्मा और ऑर्गेनाइजिंग को-चेयरमैन डॉ. अंकुर ने बताया कि यह आयोजन एसोसिएशन के 25 वर्षों की उपलब्धियों को समर्पित रहा। हैंड सर्जरी, स्पाइन सर्जरी, आर्थोस्कोपी, ऑर्थोप्लास्टिक और ट्रॉमा सहित ऑर्थोपेडिक्स की सभी प्रमुख सब-स्पेशलिटीज पर वैज्ञानिक सत्र हुए।
विशेषज्ञों ने बताया कि पहले जहां फ्रैक्चर के बाद महीनों तक बिस्तर पर रहना पड़ता था, अब नई सर्जिकल तकनीकों से मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। इससे संक्रमण, मांसपेशियों की कमजोरी और अन्य जटिलताओं का खतरा भी कम हो जाता है।
मुंबई से आए डॉ. तन्ना ने कोहनी के फ्रैक्चर और रेडियल हेड रिप्लेसमेंट की नई तकनीकें बताईं। उन्होंने कहा कि अब मरीज को लंबे समय तक हाथ बांधकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती।
सूरत के डॉ. जिग्नेश पांडेय ने घुटने के जटिल फ्रैक्चर के आधुनिक इलाज को वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए समझाया, जबकि डॉ. चेतन प्रधान ने कलाई की हड्डी के फ्रैक्चर में बुजुर्ग मरीजों के लिए उपयोगी नई फिक्सेशन तकनीक साझा की।
पुणे के संचेती हॉस्पिटल से आए डॉ. पटवर्धन ने बच्चों के हिप जॉइंट की समस्याओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज और आधुनिक तकनीकों से बच्चों को भविष्य की स्थायी विकलांगता से बचाया जा सकता है।
पूर्व इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर ने पैरों की हड्डी के फ्रैक्चर में नई नेलिंग तकनीक पर जानकारी दी, जिससे मरीज जल्दी वजन डाल सकता है और रिकवरी तेज होती है।
कॉन्फ्रेंस में आर्थराइटिस और घुटने के संरक्षण पर विशेष सत्र हुआ, जिसमें बताया गया कि सही समय पर इलाज और नई प्रक्रियाओं से कई मरीजों को जॉइंट रिप्लेसमेंट से बचाया जा सकता है।
पूर्व आईओए अध्यक्ष डॉ. राजेश मल्होत्रा ने युवा डॉक्टरों को शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित इलाज पर ध्यान देने की सलाह दी। पीजी छात्रों के लिए पेपर और पोस्टर प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें सर्वश्रेष्ठ शोध को पुरस्कृत किया गया।
कुल मिलाकर, सिल्वर जुबली कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन आधुनिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा की दिशा और दशा तय करने वाला साबित हुआ, जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के मरीजों को मिलेगा।



