प्रमोद कुमार
रायपुर, 9 फरवरी 2026

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि बस्तर की असली पहचान बारूद नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, कला और विरासत है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम ने खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि सहित 12 विधाओं को समाहित कर बस्तर की संस्कृति को नए सिरे से जीवंत किया है।
अमित शाह ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक बस्तर नक्सली हिंसा, गोलियों और IED धमाकों के कारण भय के साये में जी रहा था, लेकिन आज 55 हजार से अधिक आदिवासियों की सांस्कृतिक सहभागिता यह साबित करती है कि बस्तर नक्सल भय से मुक्त हो रहा है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक परिवर्तन बताया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का कार्य किया है। पिछली बार जहां 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं हुई थीं, वहीं इस बार 5 नई विधाएं जोड़कर कुल 12 विधाओं में आयोजन किया गया। सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से आए प्रतिभागियों ने बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रस्तुत किया।
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी कला और संस्कृति विश्व के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में दुर्लभ है। यह सिर्फ बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के काल से यहां की जनजातियों ने अपनी परंपराओं को संजोकर रखा है और आने वाले समय में बस्तर के नृत्य व कला राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया तक पहुंचे। मोदी सरकार आदिवासी जनजातियों के संरक्षण, उनकी कला, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक सम्मान दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इतिहास वही होता है जो जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहता है।
गृह मंत्री ने बताया कि बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना प्रधानमंत्री मोदी का जनजातीय समाज के प्रति सम्मान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जनजातीय शिल्प, व्यंजन और वन उत्पादों की ब्रांडिंग व मार्केटिंग को बढ़ावा देकर लाखों लोगों को रोजगार से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि नारायणपुर के पंडित राम मंडावी, हेमचंद मांझी, कांकेर के अजय कुमार मंडावी और दंतेवाड़ा की भूधरी दाती को पद्म पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा 200 करोड़ रुपये की लागत से ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना कर स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान को संरक्षित किया गया है।
अमित शाह ने राष्ट्रपति का आभार जताते हुए बताया कि बस्तर पंडुम की 12 विधाओं में शीर्ष तीन स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी संस्कृति और कला का प्रदर्शन करेंगे।
नक्सलवाद पर कड़ा संदेश देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान का मूल उद्देश्य आदिवासी किसानों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है। उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने की अपील की और कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों का सम्मानजनक पुनर्वसन करेगी। लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा—हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने किसी का भला नहीं किया, बल्कि स्कूल, अस्पताल और विकास को रोकने का काम किया। आज बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और गांवों में तिरंगा फहराने लगा है।
अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर को आदिवासी क्षेत्रों में सबसे विकसित क्षेत्र बनाया जाएगा। पर्यटन गतिविधियों से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। हर गांव में सड़क, मोबाइल टावर, पोस्ट ऑफिस और बैंक सुविधा पहुंचेगी। आदिवासियों से धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा और प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। 3500 करोड़ रुपये की रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना शुरू हो चुकी है। इंद्रावती नदी पर नई सिंचाई परियोजना से बिजली और सिंचाई दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत में अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी और सुरक्षाबलों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में बस्तर को नक्सल मुक्त किया जाएगा और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।





