प्रमोद कुमार
रायपुर | 26 फ़रवरी 2026

होली से पहले छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सियासी रंग में रंग गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन परिसर में पारंपरिक फाग गाते हुए सरकार पर तंज कसा। उन्होंने छत्तीसगढ़ी अंदाज में गाया—
“विष्णु दे दे बुल्लवा मुसवा को, मुसवा बिन घोटाला ना होए विष्णु…”
गीत में कवर्धा की उस चर्चित घटना का जिक्र था, जिसमें कथित तौर पर चूहों द्वारा करोड़ों रुपए का धान खराब किए जाने की बात सामने आई थी। फाग की पंक्तियां सुनते ही मीडिया गैलरी में ठहाके गूंजने लगे।
भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने भी गीत के जरिए पलटवार किया। उन्होंने गाया—
“पकड़ागे, पकड़ागे मुसवा मन रे… शराब घोटाला करइया, कोयला घोटाला करइया, कौनों जेल में हे भइया, कौनों बेल में हे भइया…”
भाजपा ने दावा किया कि प्रदेश में अब “सुशासन” है और घोटाले करने वाले कार्रवाई की जद में हैं।
होली के फाग गीतों में सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य की पुरानी परंपरा रही है।
- बघेल के गीत का आशय था कि “चूहे” (प्रतीकात्मक रूप से) घोटालों से जुड़े मामलों की ओर इशारा कर रहे हैं।
- भाजपा के जवाबी गीत में कहा गया कि घोटाले के आरोपी पकड़े जा रहे हैं—कोई जेल में है, कोई बेल पर।
शून्यकाल में धान खरीदी के मुद्दे पर भी जोरदार हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और कांग्रेस विधायकों ने किसानों के भुगतान और पंजीकृत किसानों से खरीद न होने का मुद्दा उठाया। नारेबाजी के बीच कुछ विधायक गर्भगृह तक पहुंच गए, जिसके बाद सदन की परंपरा के अनुसार उन्हें निलंबित कर दिया गया।
बजट सत्र के दौरान जेलों में हुई मौतों का मुद्दा भी उठा। सदन में जानकारी दी गई कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच 66 बंदियों की मृत्यु हुई है। इस पर भी सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
होली से पहले फाग के बहाने छत्तीसगढ़ की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का रंग और गहरा हो गया है।





