कोलकाता/नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल C. V. Ananda Bose ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसी के साथ लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर Kavinder Gupta ने भी पद छोड़ दिया है। दोनों के इस्तीफे के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इस्तीफे के बाद आनंद बोस दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजभवन में पर्याप्त समय बिताया है। वे नवंबर 2022 से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने राज्यपाल के इस्तीफे पर आश्चर्य जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राज्यपाल के इस्तीफे की अचानक आई खबर से वे हैरान और परेशान हैं।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने उन्हें बताया है कि R. N. Ravi को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार इस विषय में उनसे सलाह नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के राज्यपाल R. N. Ravi को पश्चिम बंगाल का अंतरिम राज्यपाल बनाए जाने की चर्चा है। आरएन रवि का तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin के साथ कई मुद्दों पर टकराव भी रहा है।
रवि पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया एजेंसी में भी काम कर चुके हैं। चुनाव से पहले किसी पूर्व IPS अधिकारी को राज्यपाल की जिम्मेदारी दिए जाने को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सी.वी. आनंद बोस 1977 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। वे कई मंत्रालयों में प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे विश्वविद्यालयों के कुलपति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।
इसी बीच लद्दाख के उपराज्यपाल Kavinder Gupta ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और वे इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले राजनेता थे।
उनके कार्यकाल के दौरान लद्दाख में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार आरक्षण जैसी मांगों को लेकर कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किए थे।





