बिलासपुर, 10 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CIDC) की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताते हुए इसे 50 हजार रुपए का जुर्माना (कॉस्ट) लगाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि CIDC ने कोर्ट में सही जानकारी नहीं दी और कैजुअल अप्रोच अपनाई। जुर्माना तीन सप्ताह के भीतर अदा करना होगा।

जांजगीर निवासी अमित कुमार राठौर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता CIDC में पदस्थ थे और 2020 में सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। अमित ने 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
पूर्व में सिंगल बेंच ने CIDC को 90 दिनों के भीतर दावे पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद CIDC ने रिव्यू पिटीशन दायर कर दावा किया कि आवेदन पहले ही खारिज किया जा चुका है, जिस पर कोर्ट ने अपना आदेश वापस ले लिया।
डिवीजन बेंच ने अपील सुनवाई के दौरान पाया कि मूल याचिका पर सुनवाई के समय CIDC ने कोर्ट को सही तथ्यों से अवगत नहीं कराया। CIDC की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें एडवांस कॉपी पर पेश होना पड़ा था, इसलिए जानकारी नहीं थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर कहा कि एक वैधानिक निगम होने के नाते CIDC की जिम्मेदारी है कि वह न्यायिक प्रक्रिया में सहायता करे।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को कम करती है।





