प्रमोद कुमार
रायपुर, 14मार्च 2026

छत्तीसगढ़ सरकार ने न्याय व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के लिए 1221 करोड़ 26 लाख 45 हजार रुपए का बजट प्रावधान किया है। विधि मंत्री गजेन्द्र यादव ने विधानसभा में बजट मांग प्रस्तुत की, जिसे सदन ने पारित कर दिया।
मंत्री यादव ने बताया कि राज्य में न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए न्यायालय भवनों और न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों के आवास निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए 88 करोड़ 63 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।
सरकार न्यायालयों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दे रही है। इस दिशा में कोर्टों के कम्प्यूटरीकरण के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है, जिससे न्यायिक प्रक्रियाएं अधिक तेज और पारदर्शी हो सकेंगी।
राज्य में गरीब, महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तालुका विधिक सेवा समितियों के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि एडीआर सेंटर (वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र) के निर्माण के लिए 2 करोड़ 40 लाख रुपए रखे गए हैं।
मंत्री यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में 94,959 लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की गई।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए 100 नए पदों के सृजन हेतु 9 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं जगदलपुर में नए एनआईए कोर्ट की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
सरकार ने कई जिला न्यायालयों में नए पद सृजित किए हैं, जिनमें दुर्ग (धमधा), बेमेतरा, महासमुंद, बिलासपुर, पंखाजूर-कांकेर, कोरबा, जगदलपुर और जांजगीर-चांपा शामिल हैं। इसके अलावा दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा (अंबिकापुर) और बस्तर (जगदलपुर) के सिविल जिला न्यायालयों में 40 पदों तथा सभी जिला न्यायालयों में 23 अनुवादक पदों के सृजन के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए 1 करोड़ रुपए तथा विश्वविद्यालय के स्थापना व्यय के लिए 13 करोड़ 50 लाख रुपए का बजट रखा गया है।
सरकार का कहना है कि यह बजट न्यायालयों के आधुनिकीकरण, न्यायिक अधोसंरचना के विकास और समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।





