प्रमोद कुमार
रायपुर, 16 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को शून्यकाल में बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन छात्रावास में छात्राओं के गर्भवती होने का मामला जोर-शोर से उठा। विपक्ष ने इस गंभीर विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की, लेकिन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया गया। इसके बाद नाराज विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बहिर्गमन कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने गंगालूर पोर्टा केबिन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नाबालिग छात्राओं, खासकर आदिवासी लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं वर्षों से सामने आती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है, इसलिए इस मामले पर सदन का काम रोककर विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए।
विधायक विक्रम मंडावी ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि घटना में शामिल दो छात्राएं 11वीं और 12वीं कक्षा की थीं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि दोनों छात्राओं को छात्रावास से भगा दिया गया और प्रशासन द्वारा मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि जब छात्रावास की अधीक्षिका के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं तो एफआईआर दर्ज कराने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आदिवासी बच्चियों को पढ़ने के लिए इसलिए भेजा जाता है कि उनके साथ ऐसी घटनाएं हों?
नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant ने कहा कि पोर्टा केबिन से जुड़ी घटनाएं नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सामने आती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में बच्चियों की अचानक मौत हो जाती है और बाद में बीमारी को वजह बता दिया जाता है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने और विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने की कोशिश नहीं की जा रही है। तीनों बच्चियां वर्तमान में पोर्टा केबिन में नहीं पढ़तीं और उनके परिजनों ने भी बताया है कि वे स्वयं आना-जाना करती थीं। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि आसंदी द्वारा स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया, जिससे विधानसभा में माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया।





