जगदलपुर, 25 मार्च 2026/ करीब पांच दशकों से नक्सलवाद की आग में झुलसता रहा बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। बंदूक की गूंज की जगह अब संविधान और विकास की आवाज सुनाई देने लगी है। इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है कुख्यात नक्सली लीडर पापा राव का आत्मसमर्पण।
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अहम सदस्य पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया। यह सिर्फ एक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि हिंसा की विचारधारा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का प्रतीक माना जा रहा है। खास बात यह रही कि आदिवासी समाज के प्रमुखों ने सभी सरेंडर नक्सलियों का संविधान की किताब और फूल देकर स्वागत किया।

सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार भी सौंपे, जिनमें 8 AK-47, 1 इंसास रायफल, 4 थ्री-नॉट-थ्री, 1 एसएलआर, 2 सिंगल शॉट गन और बीजीएल लॉन्चर शामिल हैं। साथ ही करीब 12 लाख रुपये नगद भी पुलिस को सौंपे गए।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में अब 96 प्रतिशत नक्सलवाद खत्म हो चुका है। पिछले दो वर्षों में लगभग 3000 नक्सलियों का पुनर्वास किया गया, 2000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और 500 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर 5000 से ज्यादा नक्सलियों की ताकत कमजोर की जा चुकी है।
बस्तर संभाग, कवर्धा, मानपुर-मोहला और धमतरी जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल प्रभावित माने जाते थे, अब तेजी से नक्सलमुक्त हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक शेष 4-5 प्रतिशत नक्सलवाद को भी पूरी तरह समाप्त करना है।
हालांकि चुनौती अभी बाकी है। जंगलों और सड़कों के किनारे बिछे आईईडी और बारूदी सुरंगें अब भी सुरक्षा बलों के लिए खतरा बनी हुई हैं। इन्हें लगातार बरामद किया जा रहा है। गृहमंत्री ने कहा कि जिस तरह गांव-गांव को ओडीएफ घोषित किया गया, उसी तरह अब हर गांव को ‘IED फ्री’ बनाया जाएगा।
पापा राव का सरेंडर इस बात का संकेत है कि बस्तर अब भय और हिंसा के अतीत से निकलकर शांति, विकास और विश्वास की राह पर आगे बढ़ रहा है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब बदलाव और संभावनाओं की नई आवाज सुनाई दे रही है — और यही बस्तर की नई पहचान बनती जा रही है।



