कोलकाता, 07 अप्रैल 2026। West Bengal Assembly Elections 2026 से पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन उससे पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Election Commission of India द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

चुनाव आयोग ने पहली बार जिलावार आधार पर नाम जोड़ने और हटाने (Addition/Deletion) का पूरा डेटा जारी किया है। आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
मतदाता सूची शुद्धिकरण की प्रक्रिया तीन बड़े चरणों में संपन्न हुई—
- दिसंबर 2025: ड्राफ्ट सूची के दौरान 58.2 लाख नाम हटाए गए
- फरवरी 2026: अंतिम सूची तक 5.46 लाख नाम और हटे
- ताज़ा जांच के बाद: 27 लाख से अधिक नाम हटाने का फैसला
👉 इस तरह कुल हटाए गए नामों की संख्या 90 लाख के पार पहुंच गई है।
आयोग ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (तकनीकी गड़बड़ी) के आधार पर 60 लाख से ज्यादा मामलों को जांच के दायरे में रखा था।
- अब तक 59.84 लाख मामलों का निपटारा
- 32.68 लाख नाम दोबारा जोड़े गए
- 27.16 लाख नाम स्थायी रूप से हटाए गए
- बाकी मामलों की जांच जारी
- All India Trinamool Congress (TMC) ने इसे वोटरों को बाहर करने की साजिश बताया है
- आरोप है कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों पर ज्यादा असर पड़ा
- वहीं Bharatiya Janata Party (BJP) और चुनाव आयोग का कहना है कि यह मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाने की जरूरी प्रक्रिया है
पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा—
- 23 अप्रैल 2026
- 29 अप्रैल 2026
👉 चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाने और जोड़ने के आंकड़ों ने बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अब यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन गया है।



