सतीश शर्मा
रायपुर, 09 अप्रैल 2026।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में बालोद जिले में अब तक 20 हजार 982 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है।

लखपति ग्राम की अवधारणा के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गांव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की आय अर्जित कर सके। इस पहल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में कार्य किया जा रहा है।
लखपति ग्राम का उद्देश्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए परिवारों को एक से अधिक आय स्रोत अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें उन्नत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन, सिलाई और छोटे उद्योग शामिल हैं।
जिले में इस योजना के तहत स्व-सहायता समूहों को बैंक ऋण और वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। साथ ही उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरस मेला, स्थानीय बाजार और शासकीय कार्यालयों में विक्रय की व्यवस्था की गई है।
डौंडी विकासखंड का औराटोला गांव बालोद जिले का पहला ‘लखपति ग्राम’ बनकर सामने आया है। गांव के 65 परिवार, जो 6 स्व-सहायता समूहों से जुड़े हैं, अब लखपति दीदी की श्रेणी में आ चुके हैं।
गांव की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ अन्य आजीविका गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है। इनमें मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, डेयरी, मशरूम उत्पादन और सिलाई कार्य शामिल हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि जिले में 26 हजार लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 20 हजार 982 का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और शेष लक्ष्य जल्द पूरा किया जाएगा।
औराटोला की सफलता से प्रेरित होकर अन्य गांवों में भी लखपति ग्राम बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



