मीडिया 24 डेस्क
बिलासपुर | 23 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ में चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोरबा की पूर्व कलेक्टर रानू साहू के रिश्तेदारों द्वारा दाखिल सभी याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।
कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रानू साहू के कई रिश्तेदारों की करोड़ों की संपत्ति अटैच की थी।
इनमें परिवार के कई सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग याचिकाएं लगाकर संपत्ति को मुक्त करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा—
- जुर्म से पहले खरीदी गई संपत्ति भी PMLA के तहत सुरक्षित नहीं मानी जाएगी
- “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (जुर्म से हुई कमाई) में समान मूल्य की संपत्ति भी शामिल हो सकती है
- अगर असली अवैध कमाई का पता नहीं चलता, तो उसके बराबर की दूसरी संपत्ति अटैच की जा सकती है
- ED को हर मामले में सीधे सबूत देना जरूरी नहीं
यह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एजेंसियों को बड़ी कानूनी मजबूती देता है। कोर्ट ने माना कि ऐसे अपराधों में लेन-देन जटिल होते हैं, इसलिए अप्रत्यक्ष साक्ष्य भी पर्याप्त हो सकते हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद ED की कार्रवाई को बड़ी राहत मिली है और रानू साहू से जुड़े मामले में जांच एजेंसी का पक्ष मजबूत हुआ है।



