ब्यूरो डेस्क, मीडिया 24
नई दिल्ली, 05 मई 2026

ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत के पीछे सिर्फ चुनावी लहर नहीं, बल्कि कई स्तरों पर बनाई गई रणनीति, माइक्रोमैनेजमेंट और मजबूत संगठनात्मक ढांचा काम आया। इस पूरी जीत की कहानी में 5 बड़े किरदार सामने आते हैं, जिन्होंने मिलकर बंगाल की राजनीति का समीकरण बदल दिया।
2021 की हार के बाद अमित शाह ने तुरंत समीक्षा करवाई। रिपोर्ट में तीन बड़ी कमजोरियां सामने आईं—
- TMC हिंसा का डर
- अंदरूनी घुसपैठ
- बूथ स्तर पर कमजोर पकड़
इसके बाद शाह ने स्पष्ट लक्ष्य तय किया—डर खत्म करना और संगठन मजबूत करना।
2023 से ही बंसल को बंगाल में तैनात कर दिया गया। पंचायत से लेकर विधानसभा तक की लंबी रणनीति बनाई गई।
- राजस्थान के 15-18 अनुभवी नेताओं की टीम बनाई
- हर हफ्ते दिल्ली में रिपोर्टिंग
- बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत किया
इनका काम था RSS और BJP के बीच समन्वय बनाना।
- 2 लाख से ज्यादा छोटी-बड़ी बैठकें
- मंदिर समितियों, क्लब और व्यापारी वर्ग से संपर्क
- VHP, बजरंग दल जैसे संगठनों को एक्टिव किया
- 3000+ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का नेटवर्क
- हर जिले में डिजिटल नैरेटिव सेट किया
- फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर लगातार कैंपेन
- मंडल स्तर पर हजारों लोगों की नियुक्ति
- बूथ टीमों को सैलरी और संसाधन
- हर वोटर तक पहुंचने की रणनीति
राजस्थान के नेताओं को बंगाल में प्रवासी प्रभारी बनाकर तैनात किया गया।
- हर वार्ड और बूथ पर अलग टीम
- 1000+ बैठकें, लगातार जनसंपर्क
- केंद्रीय बल के भरोसे से डर का माहौल खत्म किया गया
चुनाव के दौरान मंच से पुलिस और TMC कार्यकर्ताओं को दी गई चेतावनियां भी प्लानिंग का हिस्सा थीं।
इससे जनता के बीच संदेश गया कि BJP डर के खिलाफ खड़ी है।
सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं ने लोकल नेटवर्क संभाला, लेकिन रणनीति पूरी तरह हाईकमान के हाथ में रही।
उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर निर्णायक भूमिका निभाई।
- वोट शेयर में सिर्फ ~7% बढ़ोतरी
- लेकिन सीटें 100+ बढ़ीं
- TMC का मजबूत गढ़ भी ढह गया
👉 साफ है कि बंगाल में BJP की जीत सिर्फ राजनीतिक लहर नहीं, बल्कि लंबी तैयारी, माइक्रोमैनेजमेंट और आक्रामक रणनीति का परिणाम है।



