सतीश शर्मा
रायपुर, 08 मई 2026

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में 16 साल बाद भी किसी आरोपी का दोष साबित नहीं हो सका है। इस हमले में 75 सीआरपीएफ जवान और एक राज्य पुलिसकर्मी सहित कुल 76 जवान शहीद हुए थे।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच एजेंसियां वास्तविक हमलावरों की पहचान और दोष साबित करने में असफल रहीं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य इतने मजबूत नहीं थे कि आरोपियों को संदेह से परे दोषी ठहराया जा सके। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को तर्कसंगत और न्यायसंगत मानते हुए उसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
मामले में 2010 में 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन 2013 में दंतेवाड़ा सेशन कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
इस फैसले के बाद एक बार फिर ताड़मेटला हमले की जांच प्रक्रिया और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।





