सतीश शर्मा
रायपुर, 09 मई 2026

छत्तीसगढ़ में शनिवार को आयोजित वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत में रिकॉर्ड स्तर पर प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिला न्यायालय रायपुर समेत राज्यभर के न्यायालयों में कुल 17 लाख 5 हजार 200 मामलों का समाधान आपसी सुलह और समझौते के जरिए किया गया। लोक अदालत का उद्घाटन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर आयोजित इस लोक अदालत का संचालन छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान तालुका स्तर से लेकर हाईकोर्ट स्तर तक लंबित और प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। लोक अदालत को इस बार हाईब्रिड मोड में आयोजित किया गया, जिसमें पक्षकारों ने भौतिक उपस्थिति के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी राजीनामा किया।
लोक अदालत में राजस्व न्यायालयों के 1 करोड़ 20 लाख 54 हजार 185 मामलों का निराकरण किया गया। वहीं नगर निगम से जुड़े 16 लाख 77 हजार 996 मामलों, ट्रैफिक चालान के 10 हजार 183 मामलों, कुटुंब न्यायालय के 87 मामलों और राज्य परिवहन अपीलीय प्राधिकरण के 8 मामलों का भी समाधान हुआ। न्यायालयों में लंबित करीब 27 हजार 204 प्रकरण भी सुलझाए गए।
लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को कुल 70 करोड़ 66 लाख 80 हजार 997 रुपए की राशि प्राप्त हुई।
‘न्याय तुहर द्वार’ योजना के तहत खमतराई जोन क्रमांक-1 में मोहल्ला लोक अदालत का आयोजन किया गया। यहां लोगों ने पानी टंकियों के पास असामाजिक तत्वों के जमावड़े और निजी ठेकेदारों के कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार की शिकायत रखी। इस पर जनोपयोगी लोक अदालत के अध्यक्ष ऋषी कुमार बर्मन ने निगम अधिकारियों को सीसीटीवी लगाने और संबंधित थानों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट मयंक सोनी की अदालत में वर्ष 2023 से चल रहे सास-बहू के विवाद का भी भावुक समाधान हुआ। मारपीट और गाली-गलौच के मामले में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई कि समझौते से परिवार में शांति बनी रहती है। इसके बाद बहू ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में विवाद नहीं करने का वादा किया और दोनों गले मिलकर साथ घर लौटे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर और गुरुद्वारा धन-धन बाबा साहिब जी, तेलीबांधा के संयुक्त तत्वावधान में दूर-दराज से आए पक्षकारों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था भी की गई। इससे लोगों ने न्यायपालिका के प्रति संतोष और भरोसा जताया।



