सतीश शर्मा
रायपुर, 10 मई 2026

राजधानी के Chhattisgarh Diocese Board of Education से संचालित Salem English School में बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने 22 शिक्षकीय और 6 गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों को सेवा से टर्मिनेट कर दिया है। प्रबंधन का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से अनुशासनहीनता, शैक्षणिक कार्य में लापरवाही, समूहबाजी और संस्था विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल का माहौल प्रभावित हो रहा था।
प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विद्यालय में पिछले कई महीनों से कुछ कर्मचारी पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते थे, समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं किया जा रहा था तथा अनुशासन की लगातार अनदेखी हो रही थी। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्य और संस्था के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक और आधारहीन आरोप लगाकर अभिभावकों को गुमराह करने का प्रयास भी किया जा रहा था।
प्रबंधन ने बताया कि रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी के 29 सितंबर 2025 के आदेश को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी गई थी। इसके बाद शासन के 1 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत रायपुर कलेक्टर को प्रशासक नियुक्त किया गया। प्रशासक द्वारा 27 मार्च 2026 को वैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराए गए, जिसके बाद नई प्रबंधन समिति का गठन हुआ।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि संबंधित कर्मचारियों को सुधार के लिए कई अवसर दिए गए। उन्हें मौखिक निर्देश, लिखित मेमो, चेतावनी पत्र और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद व्यवहार में सुधार नहीं हुआ और जांच समिति की कार्यवाही की भी अनदेखी की गई।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि “विद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि हजारों अभिभावकों के विश्वास और बच्चों के भविष्य का आधार होता है। यदि शिक्षण कार्य के स्थान पर राजनीति, विवाद और अराजकता हावी हो जाए तो सबसे बड़ी क्षति बच्चों के भविष्य की होती है।”
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी व्यक्तिगत द्वेष या प्रतिशोध से प्रेरित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के हित, शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
विद्यालय प्रबंधन ने जिन कर्मचारियों को सेवा से हटाया है, उनमें शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय दोनों वर्ग शामिल हैं। इनमें अंजुला मार्टिन, संगीता सिंह, ओ.पी. देवांगन, प्रविशांत सालोमन, सपना जार्ज, श्रुति वानी, सरिता वानी, निवेदिता गांगुली, सना एजाज समेत कुल 28 कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।
Chhattisgarh Diocese Board of Education ने प्रदेश के अन्य स्कूल प्रबंधन और शैक्षणिक संस्थानों से भी अपील की है कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति से पहले संबंधित संस्था से उसका सेवा रिकॉर्ड, आचरण विवरण और NOC जरूर प्राप्त करें। बोर्ड ने कहा कि बिना सत्यापन नियुक्ति भविष्य में संस्थाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि संस्था को बदनाम करने के उद्देश्य से कुछ व्यक्तियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमानत निरस्तीकरण याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। प्रबंधन के मुताबिक इससे यह स्पष्ट होता है कि संस्था की छवि खराब करने के प्रयास लगातार किए जा रहे थे।



