गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 15 मई 2026। जिला मुख्यालय में आयोजित कांग्रेस की पत्रकार वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर महंगाई, पेट्रोल-डीजल संकट, उर्वरक की कमी और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर तीखा हमला बोला गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिलासपुर के पूर्व विधायक एवं जिले के प्रभारी शैलेश पांडेय ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को जनविरोधी बताते हुए जमकर आलोचना की।

शैलेश पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से कम उपयोग और बचत की अपील करना आम लोगों की परेशानियों को कम करने के बजाय और बढ़ाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में डीजल, पेट्रोल और गैस की आपूर्ति को लेकर संकट की स्थिति बनी हुई है, जबकि महंगाई लगातार आम जनता का बजट बिगाड़ रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में समय पर उर्वरक नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता है, लेकिन उपलब्धता सीमित है, जिससे किसान परेशान हैं।
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की “वर्क फ्रॉम होम” सलाह पर भी सवाल उठाए और कहा कि मजदूर, फेरीवाले और फील्ड में काम करने वाले लोग घर से काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह सुझाव जमीनी हकीकत से दूर है।
पत्रकार वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि खाद्य तेल, गैस, दाल और सब्जियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर अधिक टैक्स वसूली के कारण आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि 2013 की तुलना में आज सोने की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की बचत और खरीद क्षमता प्रभावित हुई है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर विदेश यात्राओं और वीवीआईपी काफिलों पर भारी खर्च करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में ईंधन बचत चाहती है तो पहले अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि देश में रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले वर्षों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे संकट की स्थिति में चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष, पूर्व विधायक मरवाही, जिला महामंत्री सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।



