नेशनल डेस्क, मीडिया 24
नई दिल्ली, 19 मई 2026

Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और लोगों पर हो रहे हमलों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए साफ कहा कि रेबीज से पीड़ित, लाइलाज बीमार और बेहद आक्रामक कुत्तों को नियमों के तहत मौत का इंजेक्शन देने पर विचार किया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को दूसरी जगह भेजने और नसबंदी से जुड़े आदेश में बदलाव की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
- अदालत ने कहा कि देशभर से बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं, जिनसे आंख नहीं फेरी जा सकती।
- कोर्ट ने माना कि सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बनाया जाए।
इन सेंटरों में:
- नसबंदी की सुविधाएं
- सर्जिकल इंफ्रास्ट्रक्चर
- प्रशिक्षित स्टाफ
- जरूरी लॉजिस्टिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएं।
साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए भी विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कुत्ता:
- रेबीज से संक्रमित हो
- लाइलाज बीमारी से पीड़ित हो
- बेहद आक्रामक और खतरनाक हो
तो मानव जीवन की सुरक्षा के लिए पशु जन्म नियंत्रण नियमों के तहत उसे मारने पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश लागू करने वाले अधिकारियों के खिलाफ FIR या आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी, यदि उन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन अच्छी नीयत से किया हो।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट्स से कहा है कि वे इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर आदेशों के पालन की निगरानी करें।
यह फैसला जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की बेंच ने सुनाया।



