• बस्तर की बेटियों के साथ विश्वासघात, पुलिस की सुस्ती ने बढ़ाया खतरा
• 43 लड़कियों को जाल में फंसाने वाला आरोपी बाहर, फॉरेंसिक रिपोर्ट अब भी गायब

कोंडागांव, 31 मई 2026
बस्तर संभाग में महिलाओं की सुरक्षा, साइबर अपराधों की जांच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अमान वीरानी नाम के आरोपी ने दोस्ती, प्रेम और शादी के झूठे वादों का जाल बिछाकर करीब 43 लड़कियों को अपना शिकार बनाया। निजी तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया, मानसिक प्रताड़ना दी गई और पैसों की उगाही की गई। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर अपराध में गिरफ्तारी के 10 महीने बाद भी पुलिस के हाथों में जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी — मोबाइल फॉरेंसिक रिपोर्ट — नहीं पहुंची है।
यह केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की सुस्ती और व्यवस्था की विफलता की कहानी भी है।
आरोपी जेल से बाहर, पीड़िताएं अब भी डर में
जुलाई 2025 में एक केंद्रीय सरकारी महिला अधिकारी की शिकायत पर अमान वीरानी गिरफ्तार हुआ था। मोबाइल जब्त हुआ, जांच शुरू हुई और डिजिटल सबूतों में 40 से अधिक युवतियों के आपत्तिजनक फोटो-वीडियो मिलने का दावा किया गया। जांच में 43 लड़कियों के नंबर सामने आए, जिनमें नाबालिग, विवाहित और शादी की तैयारी कर रही युवतियां भी शामिल थीं।
लेकिन दस महीने बाद तस्वीर उलट चुकी है। आरोपी जमानत पर बाहर है और पीड़िताओं के मुताबिक वह लगातार उन्हें धमका रहा है, समझौते का दबाव बना रहा है और केस वापस लेने के लिए मानसिक दबाव बना रहा है। सवाल यह है कि जिस व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप हैं, उसके खिलाफ जांच आखिर किस रफ्तार से चल रही है?
फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार या न्याय में देरी?
डिजिटल अपराधों में मोबाइल फॉरेंसिक रिपोर्ट सबसे अहम साक्ष्य मानी जाती है। इसी रिपोर्ट से डिलीट किए गए फोटो, वीडियो, चैट और डिजिटल गतिविधियों का खुलासा होता है। लेकिन हैरत की बात है कि नवा रायपुर साइबर लैब में भेजे गए मोबाइल की रिपोर्ट 10 महीने बाद भी लंबित है।
क्या यह सामान्य प्रक्रिया है? या फिर एक गंभीर मामले को फाइलों में दबा दिया गया है?
अगर समय पर रिपोर्ट आ जाती तो संभवतः कई नए तथ्य सामने आते और पीड़िताओं को न्याय की दिशा में ठोस कदम दिखाई देता। लेकिन यहां तो जांच की रफ्तार ही सवालों के घेरे में है।
पहली पीड़िता को छोड़ना पड़ा प्रदेश
मामले की मुख्य शिकायतकर्ता, जो एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी हैं, ने आरोपी पर दोस्ती के बहाने विश्वास हासिल करने, निजी वीडियो बनाकर 30 हजार रुपए वसूलने और विरोध करने पर मारपीट करने का आरोप लगाया। एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन दबाव इतना बढ़ा कि उन्हें छत्तीसगढ़ से ट्रांसफर लेना पड़ा।
यह केवल एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि उस भय का प्रतीक है जिसमें पीड़िताएं जीने को मजबूर हैं।
पुलिस ने साइबर एंगल को क्यों नजरअंदाज किया?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल ब्लैकमेलिंग का मामला नहीं बल्कि संगठित डिजिटल अपराध का मामला है। आरोपी के बैंक खातों, सोशल मीडिया चैट, ब्राउजर हिस्ट्री, डिजिटल ट्रांजैक्शन और नेटवर्क की गहन जांच होनी चाहिए थी।
साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराध के पैटर्न को समझना बेहद जरूरी होता है। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच अभी तक उसी दिशा में आगे बढ़ती नहीं दिख रही।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
– 43 लड़कियों के नाम सामने आने के बाद भी केवल तीन एफआईआर क्यों?
– 10 महीने बाद भी फॉरेंसिक रिपोर्ट लंबित क्यों?
– जमानत के बाद आरोपी द्वारा कथित धमकियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
– पीड़िता की ई-मेल शिकायतों पर तत्काल संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
– क्या जांच एजेंसियों ने इस मामले को उसकी गंभीरता के अनुरूप लिया?
नए एसपी का भरोसा, लेकिन जवाब का इंतजार
कोंडागांव के नए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने मामले को संवेदनशील बताते हुए साइबर लैब से रिपोर्ट जल्द मंगाने और शिकायतों की व्यक्तिगत निगरानी का भरोसा दिया है। यह आश्वासन स्वागत योग्य है, लेकिन पीड़िताओं को अब भरोसे से ज्यादा परिणाम चाहिए।

आखिर कब मिलेगा न्याय?
यह मामला केवल अमान वीरानी नाम के एक आरोपी का नहीं है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा है जो महिलाओं की सुरक्षा का दावा करती है। जब आरोपी बाहर घूम रहा हो, पीड़िताएं भय में जी रही हों और जांच की सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट महीनों तक फाइलों में अटकी रहे, तब न्याय का वादा खोखला लगने लगता है।
बस्तर की बेटियां जवाब मांग रही हैं। सवाल केवल यह नहीं कि आरोपी ने क्या किया, बल्कि यह भी है कि व्यवस्था ने अब तक क्या किया?
और जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, तब तक यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर लगा एक गंभीर प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
शादीशुदा, नाबालिग के साथ कई युवतियों को बनाया शिकार
पुलिस और साइबर टीम द्वारा जब्त किए गए आरोपी के मोबाइल से जो खुलासे हुए, वे हैरान करने वाले हैं। गैलरी में 40 से अधिक लड़कियों के आपत्तिजनक फोटो-वीडियो मिले और कांटेक्ट लिस्ट में दर्ज 43 लड़कियों के नंबरों की जांच करने पर पता चला कि इनमें 20 नाबालिग, 10 शादीशुदा और 8 ऐसी युवतियां थीं जिनकी शादी होने वाली थी। इस मामले में अब तक तीन पीड़िताओं (एक अधिकारी, एक कॉलेज छात्रा और एक नवविवाहिता) की शिकायत पर कुल 3 एफआईआर दर्ज की है ।



