9 Jun 2026, Tue

राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर खातेदारों का नाम हटाने, केसीसी लोन और धान बोनस हड़पने का आरोप, SP से हुई शिकायत

बिलासपुर/जांजगीर-चांपा, 09 जून 2026

निजी स्वामित्व की भूमि में कथित तौर पर कूटरचना कर मूल खातेदारों के नाम राजस्व अभिलेखों से विलोपित कराने, एक दशक तक केसीसी लोन निकालने तथा धान बिक्री व बोनस की राशि हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले में पीड़ित खातेदार ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर बाराद्वार निवासी रूपनारायण के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बिलासपुर निवासी त्रिवेणी शंकर साहू ने एसपी को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 53/1, कुल रकबा 3.630 हेक्टेयर भूमि में उनका तथा उनके भाई-बहनों सहित अन्य हिस्सेदारों का वैधानिक अधिकार दर्ज है। इसके बावजूद बाराद्वार निवासी रूपनारायण ने कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी करते हुए वर्ष 2014 से 2025 तक उनके नाम अभिलेखों से हटवा दिए।

 

 

शिकायत की कॉपी

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013 में तिहारू पिता आनंदराम की मृत्यु के बाद नामांतरण प्रक्रिया में त्रिवेणी शंकर सहित अन्य वारिसों के नाम दर्ज किए गए थे, लेकिन बाद के वर्षों में राजस्व अभिलेखों से उनके नाम गायब कर दिए गए। पीड़ित का दावा है कि अप्रैल 2026 में जानकारी मिलने पर उन्होंने पटवारी कार्यालय में आवेदन देकर अपने नाम पुनः दर्ज कराए।

केसीसी लोन में भी गड़बड़ी का आरोप

त्रिवेणी शंकर ने आरोप लगाया है कि सम्मिलित खातेदारों की भूमि को आधार बनाकर वर्ष 2014 से 2025 तक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण लिया गया। शिकायतकर्ता को आशंका है कि ऋण प्रक्रिया में सहमति पत्रों पर जाली हस्ताक्षर अथवा फर्जी अंगूठे के निशान का उपयोग किया गया हो सकता है।

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धान बिक्री और बोनस राशि पर कब्जे का दावा

शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि पर उत्पादित धान का विक्रय सहकारी समिति बाराद्वार के माध्यम से किया गया और बिक्री की समस्त राशि तथा बोनस रूपनारायण द्वारा अपने खाते में प्राप्त कर लिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्हें और अन्य हिस्सेदारों को उनकी हिस्सेदारी का भुगतान कभी नहीं किया गया।

सम्मिलित और एकल खाते की भूमि को मिलाकर धान बेचने का आरोप

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि रूपनारायण ने अपने नाम दर्ज अलग खाते की भूमि को सम्मिलित खाते की भूमि के साथ जोड़कर धान विक्रय किया, जबकि नियमानुसार दोनों प्रकार की भूमि का पृथक पंजीयन और विक्रय होना चाहिए। शिकायतकर्ता ने इसे भी राजस्व एवं सहकारी नियमों का उल्लंघन बताया है।

क्रय भूमि को भी कथित रूप से शामिल खाते में जोड़ा गया

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उनके स्वर्गीय पिता विजय कुमार साहू द्वारा खरीदी गई भूमि, जिसका विधिवत फौती नामांतरण उनके परिवार के नाम दर्ज है, उसे भी कथित रूप से सम्मिलित खाते में शामिल कर लाभ लिया गया।

त्रिवेणी शंकर साहू का कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में रूपनारायण से चर्चा की तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर धमकाया गया कि “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की है।

फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से मामले में जांच प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने की जानकारी मिली है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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