सतीश शर्मा
रायपुर, 15 जून 2026

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान योजना के मरीजों से अवैध वसूली पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई अस्पताल इलाज के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगता है तो उसकी शिकायत करें, सरकार ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने माना कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं करा पाना सरकार की बड़ी विफलता है।
एक विशेष साक्षात्कार में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना में पैसे मांगने वाले अस्पतालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अप्रैल महीने में 26 अस्पतालों का भुगतान रोका गया, जबकि 33 अस्पतालों का आयुष्मान पंजीयन निलंबित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि आयुष्मान योजना के खर्च और उपचार के मामले में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
मंत्री ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए इसी सप्ताह 495 बांड डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में 150 जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की भर्ती होगी। बस्तर और सरगुजा संभाग में 100 मेडिकल ऑफिसर तथा 100 विशेषज्ञ पदों को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर उन्होंने कहा कि न्यूरो और नेफ्रो जैसे विभागों में विशेषज्ञ आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। हालांकि प्रदेश में पीजी सीटों की संख्या बढ़ाई गई है और केंद्र सरकार से 260 नई सीटों की मांग की गई है। इसके स्वीकृत होने पर कुल सीटें 600 तक पहुंच जाएंगी।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर मंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में जनता का भरोसा बढ़ा है। रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में पहले प्रतिदिन करीब 1200 मरीज ओपीडी में आते थे, जो अब बढ़कर 3000 तक पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर भी बदलेगी।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए मंत्री ने बताया कि सुकमा से अटल आरोग्य लैब की शुरुआत हुई है, 20 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन सुविधा शुरू होने जा रही है और सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। वहीं, सीम्स में मेडिकल कॉलेज निर्माण, नए नर्सिंग कॉलेजों और आयुष संस्थानों का विस्तार भी किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं करा पाना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती और विफलता है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन शत-प्रतिशत सफलता अभी नहीं मिल सकी है।
मेकाहारा अस्पताल के उन्नयन पर मंत्री ने कहा कि 700 नए बेड का टेंडर जारी हो चुका है और अस्पताल के जीर्णोद्धार के लिए 50 करोड़ रुपए दिए गए हैं। उनका दावा है कि अगले एक वर्ष में मेकाहारा की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
दवाओं की गुणवत्ता को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार पहले की तुलना में कई गुना अधिक जांच करा रही है। अमानक दवाएं मिलने पर कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।




