बिलासपुर, 30 जुलाई । छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही आगे की ट्रायल प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह अंतरिम आदेश जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान जारी किया।
भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 24 जनवरी 2026 को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पहले दिए गए डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) आदेश को निरस्त करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे।

याचिका में बघेल की ओर से कहा गया कि विशेष अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए न केवल डिस्चार्ज आदेश को पलटा, बल्कि आरोपों की प्रकृति में भी बदलाव कर दिया। उनका तर्क था कि ऐसा अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट को उचित चरण पर ही प्राप्त है। साथ ही यह भी कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप तय करने के लिए आवश्यक “गंभीर संदेह” का आधार भी नहीं बनाते।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही सभी आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। इस आदेश के बाद फिलहाल ट्रायल कोर्ट में भूपेश बघेल के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया नहीं चलेगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2017 का है। आरोप है कि तत्कालीन मंत्री और भाजपा विधायक राजेश मूणत की कथित अश्लील सीडी तैयार कर उसे प्रसारित किया गया, जिससे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश रची गई। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी।
सीबीआई ने जांच के बाद भूपेश बघेल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल तथा अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए भूपेश बघेल को डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने उस आदेश को पलटते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल की आगे की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रहेगी। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगी।





