सतीश शर्मा
रायपुर, 17 जून 2026

छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से नई बिजली दरें लागू होने जा रही हैं। नए टैरिफ के तहत घरेलू, व्यावसायिक, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ेगा। हालांकि सरकार की राहत योजनाओं और सब्सिडी के कारण आम उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहने का दावा किया जा रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। 0 से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 30 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान करना होगा, जबकि 201 से 600 यूनिट तक 40 पैसे और 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा देना पड़ेगा।
नई दरों के अनुसार, 100 यूनिट बिजली खर्च करने पर करीब ₹33 और 200 यूनिट पर ₹67 तक अतिरिक्त भार पड़ेगा। वहीं 400 यूनिट खपत करने वाले उपभोक्ताओं का मासिक बिल करीब ₹178 तक बढ़ सकता है। हालांकि 10 किलोवाट तक के घरेलू कनेक्शनों के फिक्स्ड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कमर्शियल और उद्योगों पर भी असर
दुकानों, प्रतिष्ठानों और कार्यालयों के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। वहीं औद्योगिक और हाईटेंशन (HT) उपभोक्ताओं के लिए भी 25 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक दरें बढ़ाई गई हैं।
रेलवे ट्रैक्शन की बिजली दर ₹5.55 से बढ़कर ₹5.90 प्रति यूनिट कर दी गई है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार बढ़ाने के साथ डिमांड चार्ज में भी वृद्धि की गई है।
किसानों को राहत, सब्सिडी बढ़ी
कृषि पंपों के लिए बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि किसानों को राहत देने के लिए गैर-सब्सिडी वाले कृषि कनेक्शनों पर मिलने वाली ऊर्जा प्रभार छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। इससे किसानों पर बढ़ोतरी का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
ऊर्जा राहत योजना से मिलेगा फायदा
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिलती रहेगी। आयोग का दावा है कि इस योजना के कारण अधिकांश परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर रहेगा।
इसके अलावा पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर अपनाने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर भी बढ़ी हुई दरों का कम असर पड़ेगा।
नियामक आयोग का कहना है कि संशोधित टैरिफ के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली दरें अब भी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम हैं। हालांकि उद्योगों और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होने से लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।





