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पंडवानी की स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई नहीं रहीं : लोककला जगत की एक युगांतकारी आवाज हुई खामोश, देशभर में शोक की लहर

रायपुर, 05 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और पंडवानी गायन को विश्व पटल पर स्थापित करने वाली महान लोक कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स के आईसीयू में सुबह लगभग साढ़े तीन बजे अंतिम सांस ली। पिछले 38 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं, देशभर के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

तीजन बाई का जाना केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के उस जीवंत अध्याय का अंत है जिसने मिट्टी की खुशबू को दुनिया के बड़े-बड़े मंचों तक पहुंचाया। अपनी बुलंद आवाज, सशक्त अभिनय और अद्भुत प्रस्तुति से उन्होंने पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को जिस जीवंतता और भाव से उन्होंने मंच पर उतारा, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन गया।

 

 

देश ने उनकी कला को सर्वोच्च सम्मान दिया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया गया। लेकिन सबसे बड़ा सम्मान उन्हें जनता के अपार प्रेम और उस पहचान के रूप में मिला, जिसने उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा बना दिया।

आज उनकी आवाज भले ही हमेशा के लिए शांत हो गई हो, लेकिन पंडवानी की हर गूंज, हर कथा और हर मंच पर तीजन बाई की अमिट छाप हमेशा महसूस की जाएगी। छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक विरासत की सबसे अनमोल धरोहरों में से एक को खो दिया है।

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