सुकमा, 19 अगस्त 2026
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे सुकमा में पुनर्वास की तस्वीर अब सिर्फ सरकारी कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव और जिले के प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं के बीच पहुंचकर न सिर्फ उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि उनके साथ जमीन पर बैठकर उन्हीं के हाथों बना भोजन भी किया।


यह तस्वीर महज एक साथ बैठकर भोजन करने की नहीं, बल्कि प्रशासन और पुनर्वासित युवाओं के बीच विश्वास और अपनत्व का संदेश देती नजर आई।
हुनर को बनाया हथियार, रोजगार की राह तैयार
प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने लाइवलीहुड कॉलेज में पुनर्वासित युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। दो माह के इस प्रशिक्षण में 20 पुनर्वासित युवाओं को कोसा से सिल्क निकालने, उन्नत हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यानी पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार खड़ा करने वाला बनाने की कोशिश है।
सरकार का फोकस साफ है—पुनर्वास सिर्फ हिंसा का रास्ता छोड़ने तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं को सम्मानजनक आजीविका, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाए।
5G स्मार्टफोन से डिजिटल दुनिया में एंट्री
इसके बाद प्रभारी सचिव पुनर्वास केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद किया। पुनर्वास नीति के तहत 20 युवाओं को 5G स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए।

इस पहल का मकसद सिर्फ मोबाइल देना नहीं, बल्कि उन युवाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ना है, जहां आज शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और कारोबार के तमाम रास्ते खुलते हैं।
जब अधिकारी नहीं, परिवार का हिस्सा नजर आए प्रभारी सचिव
इस पूरे दौरे की सबसे खास तस्वीर तब सामने आई, जब राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं द्वारा तैयार किया गया भोजन उन्हीं के साथ जमीन पर बैठकर ग्रहण किया।
न कोई औपचारिक मंच… न कोई दूरी… बस साथ बैठकर भोजन और सीधा संवाद।
पुनर्वास की असली ताकत शायद यही है—व्यवस्था और समाज के बीच की दूरी खत्म हो और लौटे हुए युवाओं को यह एहसास हो कि वे समाज का हिस्सा हैं।

तुंगल डैम में पर्यटन की संभावनाएं
प्रवास के दौरान प्रभारी सचिव ने तुंगल डैम का भी निरीक्षण किया। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने कलेक्टर अमित कुमार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
वहीं डैम पहुंचे स्कूली बच्चों से भी उन्होंने बातचीत की और पढ़ाई के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
सुकमा से बड़ा संदेश
सुकमा में पुनर्वास की यह पहल एक बड़ा संदेश देती है—बंदूक छोड़कर लौटे हाथों को खाली नहीं रहने देना है, बल्कि उन्हीं हाथों को हुनर देना है।
कोसा से सिल्क, हथकरघे से साड़ी, सिलाई से स्वरोजगार और 5G स्मार्टफोन से डिजिटल दुनिया तक…
यानी पुनर्वास का लक्ष्य सिर्फ मुख्यधारा में वापसी नहीं, बल्कि सम्मान, रोजगार और आत्मनिर्भरता के साथ नई जिंदगी की शुरुआत है।
और जमीन पर बैठकर उन्हीं युवाओं के हाथों बना भोजन ग्रहण करने की तस्वीर इस पूरी पहल को सरकारी कार्यक्रम से आगे ले जाकर एक मानवीय कहानी में बदल देती है।





