तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, 10 जुलाई। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। इजराइली अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और तेज हो सकता है।
इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यदि हालात बिगड़ते हैं तो इजराइल ईरान के खिलाफ फिर से हमला करने में पीछे नहीं हटेगा। हालांकि सरकार नहीं चाहती कि देश के नागरिकों को दोबारा बंकरों में शरण लेनी पड़े, लेकिन सुरक्षा को लेकर किसी भी खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

इस बीच ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हवाई हमला किया, हालांकि परमाणु फैसिलिटी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दूसरी ओर अमेरिका ने इन ताजा धमाकों में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि वह अब भी कूटनीतिक समाधान का पक्षधर है।
तनाव के बीच ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया। हालांकि संबंधित देशों ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की बात कही है। वहीं ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने चीन और रूस से जुड़े एक रणनीतिक रेलवे पुल पर क्रूज मिसाइल से हमला किया, जिसे उसने युद्ध अपराध बताया।
उधर होर्मुज स्ट्रेट में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि इस समुद्री मार्ग पर ईरान का नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी नौसेना लगातार व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। दूसरी ओर ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी दखल का करारा जवाब दिया जाएगा।
तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई। वहीं अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की आशंका के बीच ईरान ने एक ही रात में करीब 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए रवाना कर दिया।
इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अब भी ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता जारी है और कतर समेत कई क्षेत्रीय देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि हालिया घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को फिर से बढ़ा दिया है।




