सतीश शर्मा
रायपुर, 17 जुलाई 2026
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) के जनसंचार शोध केंद्र में शुक्रवार को पीएचडी शोधार्थियों का प्री-सबमिशन सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में चार शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों और विभागीय शोध समिति (डीआरसी) के सदस्यों ने शोध कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें अधिक प्रामाणिक, प्रभावी और समाजोपयोगी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

सेमिनार में दीक्षा देशपांडे ने बच्चों द्वारा स्मार्टफोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु का उनके व्यवहार पर प्रभाव, विनोद सावंत ने भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयाम, विकास कुमार ने छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के संदर्भ में लोकसंचार परंपराओं तथा सैयद आमिर मुस्तफा हाशमी ने छत्तीसगढ़ और झारखंड में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कम्युनिकेशन के माध्यम से समाज के विकास पर तुलनात्मक अध्ययन विषय पर अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की मानव विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अशोक प्रधान विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। उन्होंने शोध पद्धति, संदर्भ सामग्री, मौलिकता, विश्लेषण की गुणवत्ता और सामाजिक उपयोगिता के विभिन्न पहलुओं पर सुझाव देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज, नीति-निर्माण और ज्ञान-विस्तार में भी सार्थक योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर विभागीय शोध समिति (डीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती, सदस्य डॉ. आशुतोष मंडावी और डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी शोधार्थियों के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक सुधार और परिष्कार के सुझाव दिए। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडे तथा जनसंपर्क विभाग के डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने भी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।
सेमिनार में विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही। प्रस्तुतीकरण के दौरान शोधार्थियों से उनके शोध विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे गए और विशेषज्ञों ने उनके शोध को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।





