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186 लोगों के नाम पर फर्जी लोन, 104 करोड़ का डूबत कर्ज: 30 साल बाद EOW का बड़ा एक्शन, कोर्ट में पेश की चार्जशीट

सतीश शर्मा

रायपुर, 17 जुलाई 2026

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) रायपुर ने करीब 30 साल पुराने 1.86 करोड़ रुपये के गृह निर्माण ऋण गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 15 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच में सामने आया कि सरकारी आवासीय योजना के तहत 186 सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पूरी राशि का गबन कर लिया गया। ब्याज सहित यह राशि अब बढ़कर 104 करोड़ रुपये का डूबत ऋण बन चुकी है।

जांच के अनुसार, यह घोटाला 1995 से 1998 के बीच हुआ। आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों से मिलीभगत कर 186 सदस्यों के नाम पर कुल 1.86 करोड़ रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया।

 

 

जांच में नहीं मिला एक भी मकान

EOW की भौतिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ। जिन स्थानों रायपुरा और पंडरी कांपा में दस्तावेजों के अनुसार मकान बनने का दावा किया गया था, वहां एक भी मकान निर्मित नहीं मिला। जिन लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ था, उनमें से कई सदस्य संबंधित पतों पर मौजूद ही नहीं मिले।

फर्जी प्रमाण-पत्रों के सहारे किया गया गबन

जांच एजेंसी के मुताबिक, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू ने बिना किसी वास्तविक सत्यापन के उपयोगिता प्रमाण-पत्र और भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिए। इसके बाद भोपाल मुख्यालय के अधिकारियों की मदद से ऋण स्वीकृत कराया गया और 1.86 करोड़ रुपये की राशि का गबन कर लिया गया।

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104 करोड़ का डूबत ऋण बना मामला

EOW के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक मूल राशि और ब्याज मिलाकर यह फर्जी ऋण 104 करोड़ रुपये का डूबत ऋण बन चुका है, जिससे राज्य सहकारी आवास संघ को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

पुराने मामलों में भी तेज हुई कार्रवाई

EOW ने बताया कि लंबित पुराने मामलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद इस मामले में 15,000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की गई है ताकि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

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