रायपुर, 27 जुलाई 2026
कुछ सम्मान केवल किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसकी वर्षों की तपस्या को मिलते हैं। ऐसा ही सम्मान मिला छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गंभीर पेट रोग विशेषज्ञ और उर्मिला हॉस्पिटल, भाठागांव के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विनोद सिंह को, जिन्हें उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सम्मानित किया। सम्मान के बाद अस्पताल की पैरामेडिकल टीम ने केक काटकर अपनी खुशी जाहिर की और इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

कटनी के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर प्रदेश के प्रतिष्ठित सर्जनों में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. विनोद सिंह की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। पढ़ाई के साथ खेल, स्काउट और एनसीसी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले डॉ. विनोद ने हमेशा अनुशासन और सेवा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
एमबीबीएस के बाद उन्होंने शहर नहीं, बल्कि गांव का रास्ता चुना। चिरमिरी के खड़गवां ब्लॉक में ग्रामीण सेवा के दौरान उन्होंने देखा कि इलाज के अभाव में लोग किस तरह परेशान होते हैं। यही अनुभव आगे चलकर उनकी चिकित्सा सोच की नींव बना। पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली से लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का विशेष प्रशिक्षण लिया और आधुनिक सर्जरी को आम मरीजों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

मेकाहारा मेडिकल कॉलेज से शुरू हुआ उनका सफर आज प्रोफेसर, सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर तक पहुंच चुका है। एक समय ऐसा भी था जब लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के मामले बेहद कम होते थे, लेकिन डॉ. विनोद अपने उपकरण लेकर अलग-अलग अस्पतालों में जाते और जटिल ऑपरेशन कर मरीजों को नया जीवन देते। आज वे हजारों सफल सर्जरी के साथ प्रदेश के भरोसेमंद चिकित्सकों में गिने जाते हैं।
लेकिन डॉ. विनोद सिंह की सबसे बड़ी पहचान उनकी संवेदनशीलता है। मेडिकल कॉलेज के दिनों में उन्होंने एक गरीब नवजात बच्ची के इलाज के लिए अपना पूरा स्टाइपेंड खर्च कर दिया था। आज वह बच्ची स्वस्थ जीवन जी रही है। कैंसर से जूझ रही एक किशोरी की जान बचाना भी उनके जीवन के सबसे भावुक अनुभवों में शामिल है।
डॉ. विनोद सिंह कहते हैं कि “डॉक्टर केवल मरीज का इलाज नहीं करता, वह पूरे परिवार की उम्मीद बचाता है।” शायद यही सोच उन्हें दूसरे डॉक्टरों से अलग बनाती है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी नम्रता सिंह और पूरी पैरामेडिकल टीम को दिया। उनके सहयोग से 30 बिस्तरों से शुरू हुआ उर्मिला हॉस्पिटल आज 200 बिस्तरों का आधुनिक अस्पताल बन चुका है। वहीं उर्मिला फाउंडेशन के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों के लिए एंडोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन और कई महंगी जांचें आज भी नि:शुल्क कराई जा रही हैं।
चिकित्सा को सेवा और मरीज को परिवार मानने वाले डॉ. विनोद सिंह का यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस विश्वास की पहचान है जो हजारों मरीजों ने वर्षों से उनके नाम पर कायम रखा है।





