बिलासपुर, 01 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। करीब 16 वर्षों तक चले जनआंदोलन और लगातार उठती मांगों के बाद मिली इस स्वीकृति का छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने स्वागत किया है। समिति ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का आभार जताते हुए कहा कि यह केवल रेल परियोजना की मंजूरी नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और जनभागीदारी की जीत है।
समिति ने कहा कि परियोजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब संशोधित एलाइनमेंट तैयार कर उसलापुर-गनियारी और खैरागढ़-राजनांदगांव के बीच लूप लाइन भी जोड़ी जाए। इससे मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री ट्रेनों का संचालन भी बेहतर होगा और बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई और रायपुर के लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।

2009 की साइकिल यात्रा से शुरू हुआ था आंदोलन
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की मांग वर्ष 2009 में उस समय जोर पकड़ गई थी, जब छात्र युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति ने बिलासपुर से मुंगेली, कवर्धा होते हुए डोंगरगढ़ तक नौ दिवसीय साइकिल यात्रा निकाली थी। गांव-गांव जाकर लोगों को इस परियोजना के महत्व से जोड़ा गया। इसी जनसमर्थन के बाद तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने परियोजना के पहले सर्वे को मंजूरी दी थी।
इसके बाद समिति के प्रतिनिधिमंडल ने संसद में तत्कालीन नेताओं दिलीप सिंह जूदेव, रमेश बैस, पुन्नूलाल मोहले और मधुसूदन यादव के माध्यम से रेल लाइन की मांग उठाई।
2018 में मिली थी मंजूरी, लेकिन एलाइनमेंट पर अटक गया काम
परियोजना को वर्ष 2018 में स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन बाद में एलाइनमेंट बदलने से लोरमी, पंडरिया और बिलासपुर क्षेत्र प्रभावित हुए। इसके विरोध में पंडरिया क्षेत्र में दो वर्षों तक आंदोलन चला। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने एलाइनमेंट बदलने की मांग की थी, लेकिन उस समय केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
वर्ष 2024 के बाद केंद्रीय मंत्री बनने पर तोखन साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ मिलकर इस परियोजना को दोबारा गति दी, जिसके बाद अब इसे अंतिम मंजूरी मिल गई।
संशोधित एलाइनमेंट की मांग
संघर्ष समिति ने मांग की है कि तखतपुर से कवर्धा के बीच रेल लाइन का एलाइनमेंट इस तरह तय किया जाए कि मुंगेली, लोरमी, पंडरिया, कुंडा, पांडातराई और पोंडी जैसे प्रमुख कस्बे सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ सकें। समिति का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों से 15 किलोमीटर के भीतर रेलवे स्टेशन बनाए जाते हैं तो उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र के आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।
समिति ने यह भी कहा कि वर्ष 2012 के सर्वे और 2018 के एलाइनमेंट के बाद क्षेत्र का भूगोल काफी बदल चुका है। नई सड़कें, बस्तियां और विकास कार्य हुए हैं। ऐसे में अंतिम लोकेशन सर्वे वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि परियोजना अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बन सके।





