28 Sep 2026, Mon
Breaking

किशोरों के बार-बार फरार होने पर हाईकोर्ट नाराज: छत्तीसगढ़ के 26 बाल गृहों में सुरक्षा गार्डों के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता पर जवाब

बिलासपुर, 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के फरार होने की घटनाओं को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से वित्तीय सहायता को लेकर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय गृह सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि राज्य की 26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं।

दरअसल, महासमुंद के सरकारी ऑब्जर्वेशन होम से आठ किशोरों के भागने और बिलासपुर की संस्था से चार किशोरों के फरार होने की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। इसके तहत 26 संस्थाओं में कुल 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

राज्य सरकार ने 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए वित्तीय सहायता की मांग की थी। प्रस्ताव के मुताबिक 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव से सुरक्षा व्यवस्था के लिए राज्य को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।

पढ़ें   CG में मेडिकल शिक्षा को नई उड़ान – NMC ने दी 61 नई पीजी सीटों की मंजूरी, अब राज्य में कुल 377 शासकीय मेडिकल पीजी सीटें उपलब्ध

अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। हाईकोर्ट के इस रुख के बाद बाल संप्रेक्षण एवं देखभाल गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Share

 

 

 

 

 

You Missed