जगदलपुर, 12 अगस्त 2026

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर निकाली जा रही ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ बुधवार को नारायणपुर से हलामी मुंजमेटा पहुंची। यह यात्रा नारायणपुर से बीजापुर के करेगुटालू तक निकाली जा रही है। यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री एवं स्थानीय विधायक केदार कश्यप सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और युवा शामिल हुए।
हलामी मुंजमेटा पहुंचने पर यात्रा में शामिल लोगों ने माओवादी हिंसा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बलिराम पोटाई, संतोष श्रीमाली, सोमारू राम वट्टी और अब्दुल वाहिद खान की शहादत को याद किया गया। लोगों ने भारत माता के जयकारे लगाए और देश की सुरक्षा के लिए जवानों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
शहीदों की याद में लगाए पौधे
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया। शहीदों की स्मृति में वट वृक्ष, आंवला, आम और काजू के पौधे लगाए गए। इस पहल के जरिए शहीदों की वीरगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।
विजय शर्मा बोले- अब कोई रोकने वाला नहीं
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने माओवाद के खात्मे के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब गांव में आने वाले मेहमानों को कोई रोकने वाला नहीं होगा। मेला-मड़ई रोकने, लोगों को परेशान करने और घरों को लूटने वाला कोई नहीं है।
उन्होंने कहा कि संविधान में इतनी ताकत है कि वह सभी को आगे लेकर जाता है। अब संविधान को लागू होने से रोकने वाला कोई नहीं है। उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप हर घर तिरंगा लगाने की अपील भी की।
शहीद संग्रहालय में रखी जाएगी गांव की मिट्टी
शहीदों की याद में गांव के सरपंच ने गांव की पवित्र मिट्टी यात्रा में शामिल लोगों को प्रदान की। इस मिट्टी को शहीद संग्रहालय में रखा जाएगा, ताकि शहीदों के बलिदान और क्षेत्र की ऐतिहासिक स्मृतियों को सुरक्षित रखा जा सके।
यात्रा में लघु वनोपज संघ अध्यक्ष रूपसाय सलाम, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बद्री नारायण मीणा, कलेक्टर नम्रता जैन, एसपी संदीप कुमार पटेल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और युवा मौजूद रहे।
बस्तर तिरंगा यात्रा 2026 के जरिए उन इलाकों में राष्ट्रध्वज और राष्ट्रभक्ति का संदेश पहुंचाया जा रहा है, जो लंबे समय तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे हैं।





