21 Aug 2026, Fri
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लंदन से लौटे अभिषेक नाखाते ने शुरू की ‘सॉल्व इंडिया’ नागरिक मुहिम, छत्तीसगढ़ बना एआई आधारित अभियान की पहली परीक्षण भूमि

रायपुर, 21 अगस्त 2026। लंदन में करीब दो दशक बिताने के बाद भारत लौटे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्था ‘जूम अब्रॉड’ और एआई कंपनी ‘श्रीजेन एआई’ के संस्थापक अभिषेक नाखाते ने नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए ‘सॉल्व इंडिया’ नाम से एआई आधारित नागरिक मुहिम शुरू की है। इस अभियान की शुरुआत छत्तीसगढ़ से की गई है, जिसे देश के बड़े एआई-संचालित नागरिक अभियान की पहली परीक्षण भूमि बनाया गया है।

अभियान शुरू होने के शुरुआती घंटों में ही सत्यापित नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी देखने को मिली। अभियान से औसतन हर 5.6 मिनट में एक नई नागरिक आवाज जुड़ रही है। छत्तीसगढ़ के 22 अलग-अलग शहरों से लोगों ने इसमें भागीदारी की है। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ यूके, लंदन और विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों से भी अभियान को प्रतिक्रिया और सहयोग मिल रहा है।

‘सॉल्व इंडिया’ की खासियत यह है कि नागरिकों को किसी जटिल सरकारी फॉर्म या कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। व्हाट्सएप के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं और उनके संभावित समाधान सीधे साझा कर सकते हैं। इसके बाद एआई तकनीक के जरिए नागरिकों की आवाज को व्यवस्थित कर संबंधित स्तर तक पहुंचाने और समाधान की दिशा में कार्रवाई को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

 

अभियान के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 71 प्रतिशत नागरिकों ने बिना किसी अनिवार्यता के स्वेच्छा से अपना नाम साझा किया है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह नागरिकों के भरोसे और सक्रिय भागीदारी का संकेत है।

अभिषेक नाखाते ने कहा कि आज एआई को अक्सर नौकरियों और ऑटोमेशन के संभावित खतरे के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल लोगों की समस्याओं को सुनने, समझने और समाधान से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है। ‘सॉल्व इंडिया’ इसी सोच के साथ एआई को नागरिक सहभागिता का माध्यम बनाने का प्रयास है।

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू हुई इस मुहिम का अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर 10 लाख नागरिकों तक पहुंचना है। नाखाते के अनुसार, भारत में समस्याओं की कमी नहीं है और समाधान देने वाले लोगों की भी कमी नहीं है। जरूरत केवल समस्याओं और समाधान देने वाले लोगों को बड़े पैमाने पर आपस में जोड़ने की है।

‘सॉल्व इंडिया’ को गैर-राजनीतिक और गैर-धार्मिक नागरिक मुहिम के रूप में शुरू किया गया है। अभियान के अनुसार इसकी प्राथमिकता किसी राजनीतिक या धार्मिक विचारधारा के बजाय भारतीय नागरिकों की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान की दिशा में काम करना है।

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