25 Aug 2026, Tue
Breaking

छत्तीसगढ़ में ड्रॉपआउट बच्चों की डिजिटल पहचान होगी : ‘लइका चिन्हारी’ एप से घर-घर सर्वे; स्कूल लाने पर मिलेंगे 500 रुपए

रायपुर, 25 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा ने ‘लइका चिन्हारी’ मोबाइल एप तैयार किया है। इस एप के माध्यम से शाला अप्रवेशी, शाला त्यागी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

एप के जरिए मैदानी स्तर पर घर-घर सर्वे किया जाएगा। सर्वे में चिन्हांकित बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के साथ उनकी पढ़ाई जारी रखने की भी निगरानी होगी। विभाग का उद्देश्य केवल ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़कर शिक्षा में बनाए रखना है।

चिन्हित छात्र पर सर्वेकर्ता को 20 रुपए

चयनित सर्वेकर्ता अपने एंड्राइड मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से ‘लइका चिन्हारी’ एप डाउनलोड कर अपना रजिस्ट्रेशन करेंगे। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, बसाहट और स्कूल सहित जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद संबंधित संकुल समन्वयक अपनी संकुल आईडी से सर्वेकर्ता की पात्रता और चयन का ऑनलाइन सत्यापन करेंगे।

 

 

एप में प्रत्येक चिन्हित छात्र की प्रविष्टि और सत्यापन पूरा होने पर सर्वेकर्ता को 20 रुपए प्रति छात्र प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

स्कूल में तीन माह बनाए रखने पर 500 रुपए

चिन्हित बच्चे का स्कूल में प्रवेश कराने और उसे कम से कम तीन महीने तक स्कूल में बनाए रखने के बाद प्राचार्य के सत्यापन पर सर्वेकर्ता को 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। माध्यमिक स्तर के बच्चों को छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा दिलाने पर भी 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।

पढ़ें   'राधे-राधे' बोलने पर नर्सरी बच्ची को टेप लगाकर पीटा : मदर टेरेसा स्कूल की प्रिंसिपल गिरफ्तार – दुर्ग के बाघडूमर गांव का मामला

सभी प्रोत्साहन राशि का भुगतान संबंधित जिलों के माध्यम से डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए किया जाएगा।

माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 13.8 प्रतिशत

छत्तीसगढ़ में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर करीब 13.8 प्रतिशत बताई गई है। इसे देखते हुए विभाग ने बच्चों की पहचान, स्कूल में पुनः प्रवेश और पढ़ाई में उनकी निरंतरता पर विशेष जोर दिया है। सर्वे कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर साक्षरता प्रेरकों और अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर नियमित शासकीय कर्मचारियों से भी सर्वे कराया जा सकेगा।

इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य स्कूल से बाहर बच्चों की वास्तविक संख्या और स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना तथा उन्हें दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर उनकी पढ़ाई जारी रखना है।

Share

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *