कोरबा, 25 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में देवपहरी जलप्रपात घूमने पहुंचे तीन युवक अचानक जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंस गए। सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक करीब 15 घंटे तक पानी से घिरे रहने के बाद डीडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों की मदद से तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर देवपहरी जलप्रपात में ग्राम गुरमा निवासी धनेश्वर सारथी, सूरज सारथी और घनश्याम महंत सोमवार दोपहर करीब 3:30 बजे पिकनिक मनाने पहुंचे थे। उस समय जलप्रपात में पानी का बहाव सामान्य था। तीनों जलप्रपात के किनारे बनी एक झोपड़ी में चले गए।

शाम करीब 5:30 बजे अचानक जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ही देर में पानी का बहाव तेज हो गया और तीनों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया। उन्होंने झोपड़ी में ही रुककर अपनी जान बचाई। धनेश्वर सारथी ने मोबाइल फोन से अपनी बहन को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद स्वजन और ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर लेमरू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और डीडीआरएफ को बुलाया गया। हालांकि रात में अंधेरा और तेज बहाव होने के कारण तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाना जोखिम भरा था। इसके चलते तीनों युवकों को रातभर पानी से घिरे टापू पर ही रहना पड़ा।
मंगलवार सुबह रोशनी होने के बाद डीडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया। टापू तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया गया और रस्सी की सहायता से तीनों युवकों को पानी के दूसरे छोर तक पहुंचाया गया। करीब 15 घंटे बाद तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
पांच साल में तीसरी बार पर्यटकों के फंसने की घटना
देवपहरी जलप्रपात में पर्यटकों के पानी से घिरने की यह पहली घटना नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले करीब पांच वर्षों में यहां तीन बार पर्यटकों के इसी तरह फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जलप्रपात के पास जिस स्थान पर झोपड़ी बनाई गई है, वहां अचानक जलस्तर बढ़ने पर खतरा काफी बढ़ जाता है।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश होने पर जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में टापू पर मौजूद लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाता है। स्थानीय लोगों ने झोपड़ी को सुरक्षित स्थान पर बनाए जाने की जरूरत बताई है।
बारिश में प्रतिबंध के बावजूद पहुंचे युवक
वर्षा ऋतु के दौरान देवपहरी सहित जिले के कई जलप्रपातों में पर्यटकों की आवाजाही और पिकनिक पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद तीनों युवक यहां कैसे पहुंचे, यह भी जांच का विषय है। घटना के बाद संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर निगरानी और लोगों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पूरी रात तेज बहाव और अंधेरे के बीच तीनों युवक मदद का इंतजार करते रहे। सुबह रेस्क्यू टीम के पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके बाद स्वजन ने राहत की सांस ली।





