17 Oct 2026, Sat
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26 साल बाद फिर पहनी CRPF की वर्दी: संत बने गिरवर सिंह ने कानूनी लड़ाई जीती, अब छत्तीसगढ़ के बीजापुर में संभालेंगे ड्यूटी

भोपाल, 02 सितम्बर 2026। मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी गिरवर सिंह तोमर की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी CRPF में हवलदार रहे गिरवर सिंह को विभागीय कार्रवाई के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने मंदिर में संत का जीवन अपना लिया, लेकिन अपनी नौकरी वापस पाने की उम्मीद नहीं छोड़ी।

गिरवर सिंह ने वर्ष 1991 में CRPF में हवलदार के रूप में सेवा शुरू की थी। करीब आठ साल बाद एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच हुई और वर्ष 1999 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

नौकरी जाने के बाद वह मुरैना लौटे और मंदिर में पूजा-पाठ व साधना करने लगे। बाद में गुफा मंदिर में रहने के दौरान वह गिरवर दास महाराज के नाम से संत के रूप में पहचाने जाने लगे। करीब दो दशक तक उन्होंने मंदिर सेवा में जीवन बिताया।

हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

नौकरी से बर्खास्तगी के बाद गिरवर सिंह ने वर्ष 1999 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब आठ साल बाद 2007 में अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन CRPF की ओर से इस फैसले पर स्टे ले लिया गया।

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की। वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया।

आदेश के बावजूद तत्काल नियुक्ति नहीं मिलने पर गिरवर सिंह ने अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा और लगातार अपनी सेवा बहाल कराने की मांग करते रहे।

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26 साल बाद फिर पहनी CRPF की वर्दी

आखिरकार अगस्त 2026 में उनका 26 साल लंबा इंतजार खत्म हुआ। गिरवर सिंह की CRPF में वापसी हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई।

आदेश मिलने के बाद उन्होंने बीजापुर पहुंचकर ड्यूटी ज्वाइन की और एक बार फिर CRPF की वर्दी पहन ली। जिस वर्दी को वापस पाने के लिए उन्होंने जिंदगी के 26 साल कानूनी संघर्ष में गुजार दिए, आखिरकार वह सपना पूरा हो गया।

गिरवर सिंह की कहानी इस बात की मिसाल है कि लंबे संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने अधिकार के लिए लगातार लड़ाई जारी रखी जाए तो आखिरकार न्याय मिल सकता है।

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