रायपुर, 18 सितंबर 2026
ICU में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए सेप्सिस जानलेवा स्थिति बन सकता है। ऐसे मरीजों में समय पर लक्षणों की पहचान और तुरंत इलाज बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से भाठागांव स्थित उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को सेप्सिस की शुरुआती पहचान, प्रमुख लक्षण और तत्काल उपचार को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सेप्सिस महज संक्रमण नहीं, बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की गंभीर और अनियंत्रित प्रतिक्रिया है। स्थिति बिगड़ने पर यह सेप्टिक शॉक और अंगों के काम करना बंद करने तक पहुंच सकती है।

प्रशिक्षण में SOFA स्कोर, लैक्टेट लेवल, प्लेटलेट काउंट, बिलीरुबिन और क्रिएटिनिन जैसी जांचों के महत्व पर जानकारी दी गई। साथ ही सेप्सिस के संदेह में अपनाए जाने वाले ‘वन ऑवर बंडल’ के बारे में बताया गया। इसमें शुरुआती समय में लैक्टेट की जांच, ब्लड कल्चर, जरूरत के अनुसार तत्काल ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक और फ्लूड देने जैसे उपचारात्मक कदमों पर जोर दिया गया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार ICU में गंभीर मरीजों के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसलिए स्टाफ को शुरुआती संकेत पहचानने और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी नर्सिंग स्टाफ को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के साथ अस्पताल में होने वाले संक्रमण से बचाव भी प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में डॉ. विनोद सिंह, डॉ. एस. श्रीनाथ, डॉ. मृगेंद्र सिंह, डॉ. प्रफुल्ल, एचआर दीपजय परियाल सहित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहा।




