रायपुर, 18 सितंबर 2026। राजस्व विभाग से जुड़े कामों में होने वाली देरी और प्रशासनिक जटिलताओं से आम लोगों को राहत देने के लिए राज्य में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों के बाद जमीन के नामांतरण, सीमांकन और राजस्व न्यायालयों से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है।
लंबे समय से भूमि के नामांतरण और सीमांकन में देरी के कारण लोगों को राजस्व कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे उनका समय और धन खर्च होने के साथ ही मानसिक परेशानी भी बढ़ती थी। खासकर पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार और भूमि सीमांकन से जुड़े मामलों में विवाद लंबे समय तक चलते रहते थे।

रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया आसान
भू-राजस्व संहिता में किए गए संशोधनों के तहत स्वतः नामांतरण (Auto e-Mutation) की व्यवस्था को प्रमुखता दी गई है। धारा 110 में किए गए बदलाव के बाद पंजीयन विभाग को नामांतरण से संबंधित वैधानिक अधिकार मिलने से रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।

इसके साथ ही जमीन मालिकों को अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की सुविधा मिलने से भविष्य में उत्तराधिकार संबंधी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल प्रक्रिया से तेजी और पारदर्शिता
राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से नोटिस, आधिकारिक सूचनाओं और प्रकरणों के संचालन में भी बदलाव किया गया है। धारा 33 के तहत डिजिटल माध्यमों से नोटिस और आधिकारिक सूचना भेजने को कानूनी मान्यता दी गई है।
वहीं धारा 30 के तहत राजस्व न्यायालयों में अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। इससे मामलों की प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
जिओ-रेफ्रेंस्ड नक्शों से सीमांकन में राहत
भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए धारा 107 के तहत अधिसूचित जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को अधिमान्यता दी गई है। इससे भूमि के सटीक आंकड़ों और सीमांकन से संबंधित जानकारी को अधिक विश्वसनीय एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा धारा 70 के प्रावधानों के माध्यम से कृषि जोत के आकार को व्यावहारिक बनाए रखने और अनावश्यक विखंडन को रोकने की व्यवस्था की गई है।
राजस्व व्यवस्था में किए गए इन बदलावों का उद्देश्य कोर्ट-कचहरी के चक्कर, अनावश्यक देरी और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना तथा नागरिकों को तकनीक आधारित एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे जमीन मालिकों के समय, धन और मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।




