इंदौर, 21 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में अल्जाइमर की शुरुआती पहचान और समय रहते रोकथाम की दिशा में एक अहम पहल हुई है। संपूर्ण सोडानी डायग्नोस्टिक क्लिनिक ने अल्जाइमर की शुरुआती पहचान के लिए नया ब्लड बायोमार्कर टेस्ट लॉन्च किया है। दावा है कि इस टेस्ट के जरिए बीमारी से जुड़े मस्तिष्कीय बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण सामने आने से 10 से 15 साल पहले तक लगाया जा सकता है।
अल्जाइमर दुनिया में डिमेंशिया के सबसे आम कारणों में से एक है। आमतौर पर इसकी पहचान तब होती है, जब व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर बीमारी का असर काफी बढ़ चुका होता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर पहचान होने से मरीज की आगे की जांच, चिकित्सकीय सलाह और उपचार की योजना समय रहते बनाई जा सकती है।

अब तक की जांचें महंगी और जटिल
अल्जाइमर से जुड़े बदलावों की पहचान के लिए अब तक सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) टेस्ट और एमिलॉयड PET स्कैन जैसी जांचों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। CSF जांच के लिए स्पाइनल टैप जैसी प्रक्रिया करनी पड़ती है, जबकि दोनों जांचें अपेक्षाकृत महंगी हैं और हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

संपूर्ण हेल्थकेयर के अनुसार, इंदौर में फिलहाल एमिलॉयड PET स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिवारों को ऐसी जांच के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ सकता है।
pTau217 और Aβ42 की होगी जांच
नया ब्लड टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े दो महत्वपूर्ण बायोमार्कर्स pTau217 और Aβ42 की जांच करता है। कंपनी के मुताबिक ये दोनों बायोमार्कर अल्जाइमर से जुड़े मस्तिष्कीय बदलावों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस टेस्ट के लिए K2 EDTA प्लाज्मा सैंपल की जरूरत होती है और कंपनी के अनुसार रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध हो सकती है।
किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है टेस्ट?
यह टेस्ट खास तौर पर इन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है—
- 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग
- शुरुआती दौर में याददाश्त या कॉग्निटिव डिक्लाइन की परेशानी महसूस करने वाले लोग
- परिवार में अल्जाइमर या डिमेंशिया का इतिहास रखने वाले लोग
- ऐसे मरीज जिन्हें न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन ने कॉग्निटिव असेसमेंट की सलाह दी हो
संपूर्ण हेल्थकेयर ने बताया बड़ा बदलाव
संपूर्ण हेल्थकेयर के प्रवक्ता ने कहा कि नया ब्लड टेस्ट अल्जाइमर की जांच को अधिक आसान और कम तकलीफ वाला विकल्प उपलब्ध करा सकता है। उनके मुताबिक, बीमारी की जल्दी पहचान होने से मरीज और परिवार समय रहते मेडिकल फैसले लेने, आगे की जांच कराने और भविष्य की योजना बनाने में सक्षम हो सकते हैं।
संपूर्ण हेल्थकेयर के अनुसार, डायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में 34 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ संस्थान सेंट्रल इंडिया में आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। नए अल्जाइमर ब्लड बायोमार्कर टेस्ट को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
नोट: यह टेस्ट अल्जाइमर की बीमारी का अंतिम निदान अपने-आप स्थापित करता है या नहीं, यह चिकित्सकीय मूल्यांकन और संबंधित क्लिनिकल गाइडलाइन पर निर्भर करता है। टेस्ट कराने से पहले डॉक्टर/न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लेना उचित है।




