29 Sep 2026, Tue
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महानदी विवाद पर निर्णायक संवाद की ओर छत्तीसगढ़ – ओडिशा : 1 अक्टूबर को अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित, जल बंटवारे पर समाधान संभव

• केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक

• बिहार और झारखंड के बीच अगस्ते सुलझा जल विवाद, दोनों राज्यों के सीएम की इत शाह ने ली थी बैठक

रायपुर, 29 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की कवायद अब एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक अक्टूबर को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

जल बंटवारे से लेकर प्रबंधन तक पर होगी बात

बैठक में महानदी के जल बंटवारे और उसके प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर दोनों राज्यों का पक्ष सामने रखा जाएगा। ओडिशा के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने बैठक की जानकारी दी है। माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर आपसी सहमति से समाधान तलाशने पर रहेगा।

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के सचिव पिछली बैठकों से संबंधित जानकारी महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष भी प्रस्तुत कर चुके हैं। ट्रिब्यूनल ने इसे रिकॉर्ड पर लिया है।

20 सितंबर को भुवनेश्वर में हुई थी अहम मुलाकात

विवाद के समाधान की दिशा में दोनों राज्यों के बीच हाल के महीनों में संवाद बढ़ा है। 20 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। करीब एक घंटे से अधिक चली इस बैठक में विभिन्न विषयों के साथ महानदी जल विवाद पर भी चर्चा हुई थी।

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बैठक के बाद मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि दोनों राज्यों के बीच इस विषय पर समाधान के लिए बातचीत जारी है और जल्द रास्ता निकलने की उम्मीद है।

30 जुलाई की बैठक से आगे बढ़ेगी बातचीत

इससे पहले 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, बैठक का उद्देश्य बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के जरिए विवाद का समाधान तलाशना था।

एक अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक को इसी संवाद प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है। इसमें दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।

2018 से ट्रिब्यूनल में लंबित है मामला

महानदी जल बंटवारे का विवाद वर्ष 2018 से महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल में लंबित है। वर्षों से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया के बीच अब दोनों राज्यों के बीच सीधे संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

महानदी सिर्फ पानी नहीं, दोनों राज्यों की जरूरत

महानदी का महत्व केवल जल बंटवारे तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ में यह सिंचाई, पेयजल और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि ओडिशा में सिंचाई, बिजली उत्पादन और उद्योगों की जरूरतें इससे जुड़ी हैं।

यही वजह है कि महानदी के पानी का सवाल दोनों राज्यों के लिए आर्थिक और सामाजिक महत्व रखता है। अब नजर एक अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक पर है – जहां वर्षों पुराने विवाद में संवाद के जरिए समाधान की दिशा में कोई ठोस आधार तैयार होता है या नहीं।

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