भिलाई, 29 सितम्बर 2026। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सामने आए करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। मामले को CBI को सौंपने संबंधी आदेश राजपत्र में जारी होने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी की औपचारिक एंट्री हो गई है। अब तक इस प्रकरण की जांच पुरानी भिलाई पुलिस कर रही थी।
पुलिस कार्रवाई में BSP के अधिकारियों-कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टर, कारोबारी और निजी कंपनी संचालकों समेत 21 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामला 26 मई को पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम और हथखोज क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आया था।

250 टन स्क्रैप और 3.22 करोड़ की सामग्री जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने BSP से चोरी किए जाने के संदेह वाले करीब 250 टन लौह स्क्रैप के साथ वाहन, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी जब्त की थी। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

जांच में सामने आया कि स्क्रैप को फ्लाई ऐश या अन्य सामग्री की आड़ में प्लांट से बाहर निकालकर पहले गोदाम पहुंचाया जाता था। इसके बाद उसे आगे निजी इकाइयों में खपाने की कड़ी जुड़ती थी।
ट्रांसपोर्टर से निजी कंपनी के डायरेक्टर तक गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस ने ट्रांसपोर्टर संजय सिंह, उनके बेटे अभय सिंह, भाजपा नेता भास्कर मुदलियार, कारोबारी हिमांशु खंडेलवाल और BSP के जीएम हिमांशु भूषण मलिक, मनोज कुमार देवांगन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया।
18 सितंबर को रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड, रसमड़ा के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों पर चोरी के स्क्रैप को निजी औद्योगिक इकाई में खपाने से जुड़े होने का आरोप है। इसके बाद गिरफ्तार आरोपितों की संख्या 21 हो गई।
BSP के तीन अधिकारी-कर्मचारी निलंबित
मामले की जांच के दौरान BSP प्रबंधन ने जीएम हिमांशु भूषण मलिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव धनंजय वर्मा और मनोज कुमार देवांगन को निलंबित किया। पुलिस ने स्क्रैप यार्ड की निगरानी, स्टॉक रिकॉर्ड और स्क्रैप बाहर जाने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी जांच की।
कई आरोपितों को हाई कोर्ट से जमानत
मामले में कुछ आरोपितों को हाई कोर्ट से राहत भी मिली है। अभय सिंह और हिमांशु खंडेलवाल को अग्रिम जमानत, जबकि हिमांशु भूषण मलिक और उपेंद्र उर्फ पिंटू ओझा को नियमित जमानत मिली। 13 अगस्त को BSP इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज कुमार देवांगन को भी हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिली।
लगातार उठ रही थी CBI जांच की मांग
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने शुरुआत से ही मामले की CBI जांच की मांग की थी। उन्होंने विधानसभा में अशासकीय संकल्प लाने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ केंद्र सरकार से भी जांच की मांग की थी। 20 जुलाई को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की थी।
अब राजपत्र में CBI जांच संबंधी आदेश जारी होने के बाद केंद्रीय एजेंसी पूरे मामले की जांच करेगी। जांच में स्क्रैप चोरी की पूरी कड़ी, प्लांट से बाहर निकालने की प्रक्रिया, परिवहन, भंडारण और निजी इकाइयों में खपत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल हो सकती है।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि चोरी का कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें किन-किन स्तरों पर लोगों की भूमिका रही। पुलिस द्वारा जुटाए गए दस्तावेज, तकनीकी साक्ष्य और गिरफ्तार आरोपितों से संबंधित रिकॉर्ड CBI जांच में अहम आधार बन सकते हैं।




