रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए जिला आयोग के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें मॉल में आने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूलने को अनुचित माना गया था।
जिला आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को अपने आदेश में मॉल प्रबंधन को उपभोक्ताओं के लिए निशुल्क पार्किंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ अंबुजा सिटी सेंटर मॉल की ओर से राज्य आयोग में अपील दायर की गई थी।

मामले में अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला स्वयं परिवादी के रूप में पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) और विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत किए।

राज्य आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा शामिल थे, ने जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा। आदेश में मॉल की ओर से दुकानों से सुरक्षा, बिजली, एस्केलेटर सहित अन्य सुविधाओं के लिए मेंटेनेंस शुल्क लिए जाने के साथ उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से अलग से पार्किंग शुल्क वसूलने के पहलू पर भी विचार किया गया।
आयोग ने इस व्यवस्था को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी से संबंधित माना। आदेश में निजी परिसर में FASTag के माध्यम से स्वचालित पार्किंग/टोल वसूली के अधिकार को लेकर भी मॉल प्रबंधन के दावे पर विचार किया गया।
FSI छूट और पार्किंग शुल्क का मुद्दा
मामले में पार्किंग के लिए भवन निर्माण नियमों के तहत मिलने वाली एफएसआई (FSI) छूट का मुद्दा भी सामने आया। आदेश के अनुसार, इस आधार पर पार्किंग सुविधा और उसके लिए उपभोक्ताओं से शुल्क वसूली के संबंध में कानूनी प्रावधानों की व्याख्या की गई है।
राज्य आयोग के आदेश को प्रदेश में मॉल और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग शुल्क से जुड़े उपभोक्ता विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी आदेश का प्रभाव उसके विशिष्ट तथ्यों, लागू नियमों और कानूनी दायरे के अनुसार निर्धारित होता है।
इस फैसले के बाद मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर उपभोक्ता अधिकारों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारियों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।




