रायपुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को विकसित करने की योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने शोध के आधार पर राम वनगमन पथ के विकास के लिए स्थलों का चयन किया है। योजना के तहत वर्ष 2026 से 2029 तक तीन चरणों में विकास कार्य प्रस्तावित हैं। चयनित स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं को ठहरने सहित अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें।
तीन चरणों में पूरा होगा विकास कार्य
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, राम वनगमन पथ से जुड़े स्थलों का विकास तीन वित्तीय वर्षों में किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2026-27, दूसरे चरण में 2027-28 और तीसरे चरण में 2028-29 के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है।

पहले चरण में इन स्थलों का होगा विकास
वर्ष 2026-27 के पहले चरण में रुद्रेश्वर महादेव मंदिर (रुद्री, धमतरी), शृंगी ऋषि-सप्तर्षि आश्रम (नगरी-सिहावा), खरौद, रामाराम, चिंतामीटर मंदिर (सुकमा), रामगढ़, सीता बेंगरा, रामझरना (रायगढ़), विष्णु मंदिर (रामपुर-जुनवानी, कांकेर), चित्रकोट शिव मंदिर और सीतामढ़ी-हरचौका सहित कई स्थलों के विकास की योजना है।

दूसरे चरण में इन धार्मिक स्थलों पर काम
वर्ष 2027-28 के दूसरे चरण में राम-लक्ष्मण पायन, सीतामढ़ी-छतोड़ा, सीतामढ़ी-रापा, सीतामढ़ी-कनवाई, सीता लेखनी, सीताकुंड, राम-जानकी मंदिर (सारासोर), पैसर घाट, गड़िया मंदिर, छोटे डोंगर शिव मंदिर तोडमा, राम मंदिर (सूरजपुर) और कोटमसर-कोटि महेश्वर जैसे स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव है।
तीसरे चरण में शिवरीनारायण और सिरपुर समेत अन्य स्थल
वर्ष 2028-29 के तीसरे चरण में इंजराम शिव मंदिर, सिंगेश्वर, लोमश ऋषि आश्रम, विष्णु मंदिर, कुलेश्वर मंदिर, तीरथगढ़, सीताकुंड, मांडव्य आश्रम, शिवरीनारायण, वाल्मीकि आश्रम, वागेश्वर शिव मंदिर, रक्सा डोंगरी और सिरपुर स्थित राम दिवाला सहित अन्य स्थलों का विकास प्रस्तावित है।
कांग्रेस ने चंद्रखुरी मंदिर को लेकर उठाए सवाल
राम वनगमन पथ के लिए स्थलों के चयन को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग से जुड़े 75 स्थलों को विकसित करने की पहल की थी। इनमें चंद्रखुरी, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी-हरचौका, रामगढ़, राजिम, नगरी-सिहावा, रामाराम, तुरतुरिया और चंपारण सहित नौ स्थलों पर निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा घोषित स्थलों की सूची में माता कौशल्या मंदिर, चंद्रखुरी का उल्लेख नहीं होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राम वनगमन पथ से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और पहले से शुरू किए गए अधूरे विकास कार्य भी पूरे किए जाने चाहिए।
शोध के आधार पर स्थलों के चयन का दावा
राज्य सरकार ने स्थलों के चयन के पीछे शोध का हवाला दिया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु की वर्ष 2018 में प्रकाशित पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ’ और पंडित राम अवतार शर्मा के अध्ययन को आधार बताया गया है। पंडित शर्मा ने अयोध्या से श्रीलंका तक भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग का अध्ययन करते हुए देशभर के 240 से अधिक स्थलों का उल्लेख किया था।
पर्यटन मंत्री और कांग्रेस ने रखे अपने-अपने तर्क
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थलों को राम वनगमन पथ से जोड़ने का उल्लेख किसी ग्रंथ में नहीं मिलता। सरकार के अनुसार, चयन शोध के आधार पर किया गया है और अधूरे विकास कार्यों को भी पूरा किया जाएगा।
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चंद्रखुरी में माता कौशल्या मंदिर के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने भाजपा पर भगवान श्रीराम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाया।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर नजर
राम वनगमन पथ के विकास से छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। हालांकि, स्थलों के चयन और चंद्रखुरी मंदिर को सूची में शामिल नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। अब योजना के निर्धारित चरणों में कार्य पूरा करना और चयनित स्थलों पर सुविधाएं विकसित करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।



