बिलासपुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में धान खरीदी से पहले गिरदावरी में गड़बड़ी रोकने के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली लागू की गई है। एग्रीस्टैक पोर्टल के जरिए अब किसान घर बैठे अपने खेत में दर्ज फसल और रकबे की जानकारी देख सकेंगे। रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर ऑनलाइन दावा-आपत्ति दर्ज कराकर सुधार की मांग भी कर सकेंगे।
हर साल समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान गिरदावरी में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। किसानों का आरोप रहा है कि खेतों में धान की फसल होने के बावजूद रिकॉर्ड में रकबा कम कर दिया जाता है या फसल के स्थान पर पड़त भूमि दर्ज कर दी जाती है। इससे किसानों का धान बेचने का पात्रता कोटा प्रभावित होता है और उन्हें राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

चार विकासखंडों के किसान उठा सकेंगे लाभ
बिलासपुर जिले के बिल्हा, मस्तूरी, कोटा और तखतपुर विकासखंडों के किसान डिजिटल फसल सर्वेक्षण पोर्टल पर अपने खेत की जानकारी जांच सकेंगे। इसके लिए उन्हें जिले, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल, पटवारी हल्का और गांव का चयन करने के बाद खसरा नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद पोर्टल पर संबंधित खेत में दर्ज फसल और रकबे का विवरण दिखाई देगा।

यदि किसान के खेत में धान की फसल लगी है, लेकिन रिकॉर्ड में पड़त भूमि दर्ज है या धान का रकबा कम दिख रहा है, तो वह तत्काल ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकता है।
ऑनलाइन शिकायत के बाद होगा भौतिक सत्यापन
पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत निवारण विकल्प के माध्यम से किसान को अपना मोबाइल नंबर और गड़बड़ी का विवरण दर्ज कर आवेदन सबमिट करना होगा। शिकायत दर्ज होने के बाद संदर्भ क्रमांक मिलेगा, जिससे आवेदन की पहचान की जा सकेगी।
इसके बाद संबंधित राजस्व अमले को मौके पर पहुंचकर खेत का भौतिक सत्यापन करना होगा। प्रशासन का उद्देश्य धान खरीदी शुरू होने से पहले रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों का निराकरण करना है, ताकि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर परेशानी का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर ने किसानों से की अपील
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के अनुसार, डिजिटल क्रॉप सर्वे पोर्टल से गिरदावरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। किसान स्वयं अपने खसरे में दर्ज फसल और रकबे की पुष्टि कर सकते हैं। यदि किसी प्रविष्टि में त्रुटि मिलती है, तो पोर्टल पर ऑनलाइन दावा-आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। राजस्व अमले द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद धान खरीदी से पहले त्रुटियों का निराकरण किया जाएगा।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने से किसानों को समय रहते अपने खेत का रिकॉर्ड जांचने का अवसर मिलेगा। इससे गिरदावरी में गड़बड़ी की शिकायतों पर कार्रवाई करने और धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



