• चार साल की बेटी के साथ अपने हक की लड़ाई लड़ने का दावा, वर्षों से राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने का आरोप; पुराने दस्तावेजों से लेकर डिजिटल हिस्ट्री तक की जांच की मांग
बलौदाबाजार, 14 अक्टूबर 2026

जमीन अपनी, पुराने दस्तावेज अपने… फिर भी राजस्व रिकॉर्ड में दूसरे का नाम कैसे दर्ज हुआ? छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी क्षेत्र से भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम बटगन निवासी सुनीता शर्मा ने अपनी जमीन के रिकॉर्ड में कथित तौर पर अनधिकृत बदलाव किए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। कलेक्टर के माध्यम से सौंपे गए आवेदन में उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

तीन खसरों की जमीन, रिकॉर्ड में बदलाव पर सवाल
सुनीता शर्मा के आवेदन के मुताबिक, ग्राम बटगन, पटवारी हल्का नंबर 20, राजस्व निरीक्षक मंडल गिरपुरी और तहसील पलारी में उनकी भूमि स्थित है। इसमें खसरा नंबर 265/17, 473/3 और 541/53 शामिल हैं। तीनों खसरों का कुल रकबा लगभग 0.3940 हेक्टेयर बताया गया है।
महिला का दावा है कि पुराने खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका और अन्य राजस्व अभिलेखों में उनके भूमि अधिकार से संबंधित प्रविष्टियां मौजूद हैं। इसके बावजूद उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
अब सवाल यह है कि यदि रिकॉर्ड में नाम बदला गया, तो किसके आदेश पर, किन दस्तावेजों के आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत यह बदलाव हुआ?
30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त, फिर बदलाव कैसे हुआ?
मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु ऑनलाइन नामांतरण प्रकरण से जुड़ा है। आवेदन में उल्लेख है कि वर्तमान भूमिस्वामी के रूप में ‘सुनीता’ और प्रस्तावित भूमिस्वामी के रूप में ‘भगवती’ का नाम दर्ज था। महिला के अनुसार, ऑनलाइन विवरण में अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण आवेदन के कारण 30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त किए जाने का उल्लेख भी है।
ऐसे में महिला ने मांग की है कि नामांतरण निरस्त होने के बाद यदि राजस्व रिकॉर्ड में कोई बदलाव हुआ है, तो उसकी पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए। हालांकि, रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े और अनधिकृत बदलाव की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं, मूल दस्तावेज भी खंगालने की मांग
सुनीता शर्मा ने जांच को केवल ऑनलाइन प्रविष्टियों तक सीमित रखने के बजाय मूल राजस्व अभिलेखों की पड़ताल करने की मांग की है। इसमें मूल मिसल रिकॉर्ड, बी-1, खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका, नामांतरण पंजी, आवेदन और आदेश, नोटिस तामीली तथा कथित सहमति पत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही संबंधित हस्ताक्षरों की सत्यता, रजिस्ट्री या अन्य विलेख और ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुए प्रत्येक बदलाव की डिजिटल हिस्ट्री व लॉग की जांच कराने की मांग की गई है। महिला चाहती हैं कि जांच से यह स्पष्ट हो कि रिकॉर्ड में बदलाव किसने किया और उसके पीछे कौन-से दस्तावेज या आदेश थे।
चार साल की बेटी के साथ संघर्ष, मानसिक-आर्थिक परेशानी का दावा
आवेदन में सुनीता शर्मा ने अपनी चार वर्षीय बेटी का जिक्र करते हुए कहा है कि लंबे समय से राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानी झेलने की बात भी कही है।
आवेदन में महिला ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए आत्मदाह जैसे विचार आने का उल्लेख किया है। ‘न्याय दो या आत्मदाह की अनुमति दो’ जैसी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने शासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूमि विवाद का तत्काल, समयबद्ध निराकरण कराने की मांग की है। यह स्थिति मामले की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करती है।
जांच पूरी होने तक जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव रोकने की मांग
महिला ने कलेक्टर स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराने, पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा डिजिटल हिस्ट्री की पड़ताल करने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि के नए नामांतरण, हस्तांतरण और राजस्व अभिलेखों में किसी भी नए बदलाव पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
उनकी मांग है कि यदि जांच में फर्जीवाड़ा, कूटरचना या अनधिकृत रिकॉर्ड परिवर्तन प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के साथ संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही गलत या अवैधानिक प्रविष्टियां निरस्त कर भूमि रिकॉर्ड को कानून के मुताबिक दुरुस्त किया जाए।
अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें
फिलहाल महिला के आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की जांच संबंधी कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले में मूल राजस्व दस्तावेजों, नामांतरण आदेशों और डिजिटल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच अहम होगी।

