रायपुर, 14 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का सफर महंगा होने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि और ट्रांसपोर्टरों की लगातार मांग को देखते हुए सरकार ने किराए में मामूली बढ़ोतरी की है। हालांकि, नई दरों के सामने आने के बाद किराया वृद्धि के वास्तविक प्रतिशत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बस किराया बढ़ाने के फैसले पर कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं और ट्रांसपोर्टर भी लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किराए में सामान्य बढ़ोतरी की गई है।

8 अक्टूबर को जारी हुई नई किराया दरें
छत्तीसगढ़ के परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर यात्री बसों की नई किराया दरें निर्धारित की हैं। इसके तहत साधारण, डीलक्स, वातानुकूलित और स्लीपर सहित विभिन्न श्रेणियों की बसों के किराए में बदलाव किया गया है। नई दरें लागू होने से यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये किया गया है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर दर में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, साधारण बसों में शुरुआती पांच किलोमीटर का किराया 10 रुपये निर्धारित किया गया है।
नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर
बस किराए में बढ़ोतरी का असर रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है। बड़ी संख्या में लोग काम, पढ़ाई और व्यापार के सिलसिले में बसों से एक शहर से दूसरे शहर तक सफर करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यात्री बसें आवागमन का प्रमुख साधन हैं।
ऐसे में किराए में वृद्धि होने से नियमित यात्रियों का मासिक यात्रा बजट बढ़ सकता है। लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को भी पहले के मुकाबले अधिक किराया देना होगा।
सरकार ने लागत बढ़ने को बताया वजह
सरकार की ओर से किराया बढ़ाने के पीछे परिवहन व्यवसाय की बढ़ती लागत और बस संचालकों की मांग को प्रमुख वजह बताया गया है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के मुताबिक, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण ट्रांसपोर्टर किराया संशोधित करने की मांग कर रहे थे।
हालांकि, सरकार ने इस बढ़ोतरी को मामूली बताया है, लेकिन साधारण बसों की प्रति किलोमीटर दर में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में नई किराया दरों को लेकर सरकार के तर्क और आम यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक असर की चर्चा तेज हो गई है।


